Birthday Special: सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ़ गुलज़ार (Gulzar) भारतीय गीतकार, कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक तथा नाटककार हैं। गुलजार को हिंदी सिनेमा के लिए कई प्रसिद्ध अवार्ड्स से भी नवाजा जा चुका है। यह शायरी, गजलों और नज्मों के अलावा अपनी फ्री वर्स स्टाइल की कविताओं के लिए भी एक खास पहचान रखते हैं।

गुलज़ार का परिचय:

असली नाम: सम्पूरन सिंह कालरा ‘गुलजार’
निक नाम: गुलज़ार
जन्म: 18 August 1934
जन्म स्थान: दीना, पाकिस्तान
पिता का नाम: माखन सिंह कालरा
माता का नाम: सुजन कौर
व्यवसाय: निर्देशक, लेखक, कवि और गीतकार
लाइफ पार्टनर: राखी गुलज़ार
बच्चे: 1

जन्म और शिक्षा:

गुलजार का जन्म 18 अगस्त 1934 को दीना, पाकिस्तान में हुआ था। उनका असली नाम संपूर्ण सिंह कालरा है। स्कूल के दिनों से ही शेरो-शायरी और वाद्य संगीत का शौक था। उनके पिता का नाम माखन सिंह कालरा और उनके माता का नाम सुजन कौर है। उन्हें बचपन से ही कविताएं लिखने का बहुत शौक था। कॉलेज के दिनों में उनकी रूचि संगीत में इतनी बढ़ गयी थी कि, वे रवि शंकर और अमजद अली खान जैसे कलाकारों के कन्सर्ट सुनने जाया करते थे।

गैराज में किया काम:

भारत विभाजन के बाद गुलजार का परिवार अमृतसर में बस गया, लेकिन वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई आ गए और वर्ली में एक गैराज में कार मकैनिक का काम करने लगे। फुर्सत के वक्त में वह कविताएं लिखा करते थे। इसी दौरान वह फिल्म से जुड़े लोगों के संपर्क में आए और निर्देशक बिमल राय के सहायक बन गए। बाद में उन्होंने निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी और हेमन्त कुमार के सहायक रूप में भी काम किया।

करियर की शुरुआत:

गुलज़ार ने अपने करियर की शुरुआत बतौर गीत लेखक एस.डी. बर्मन की फिल्म ‘बंदिनी’ से किया था। गुलजार ने कई फिल्मों की पटकथा और संवाद भी लिखे। उन्होंने 1968 में आई फिल्म ‘आशीर्वाद’ का संवाद लेखन किया। इस फिल्म में अशोक कुमार नजर आये थे। इस फिल्म के लिए अशोक कुमार को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी मिला था। इसके अलावा गुलजार ने वर्ष 1977 में ‘किताब’ और ‘किनारा’ फिल्मों का निर्माण भी किया।

विवाह:

गुलज़ार की शादी तलाकशुदा अभिनेत्री राखी गुलजार से हुई हैं। हालंकि इन दोनों का रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं टिका और बेटी के पैदा होने के बाद दोनो अलग हो गए। लेकिन गुलजार साहब और राखी ने कभी भी एक-दूसरे से तलाक नहीं लिया। उनकी एक बेटी हैं, मेघना गुलजार जो कि, एक फिल्म निर्देशक हैं।

गीतकार के रूप में:

राहुल देव बर्मन के संगीत निर्देशन में गीतकार के रूप में गुलजार की प्रतिभा निखरी और उन्होंने दर्शकों और श्रोताओं को ‘मुसाफिर हूं यारो’, परिचय, तेरे बिना जिन्दगी से कोई शिकवा तो नहीं, आंधी, घर जाएगी खुशबू, ‘मेरा कुछ सामान’, इजाजत, तुझसे नाराज नहीं जिन्दगी, मासूम जैसे साहित्यिक अंदाज वाले गीत दिए। संजीव कुमार, जितेन्द्र और जया भादुड़ी के अभिनय को निखारने में गुलजार ने अहम भूमिका निभायी थी। गुलजार के चमकदार करियर में एक गौरवपूर्ण नया अध्याय तब जुड़ गया जब वर्ष 2009 में फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ में उनके गीत ‘जय हो’ को ऑस्कर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

टीवी करियर:

गुलज़ार ने बड़े पर्दे के अलावा छोटे पर्दे के लिए भी काम किया है। उन्होंने दूरदर्शन पर आने वाला शो ‘जंगल बुक’ के लिए मशहूर गाना ‘चड्ढी पहनके फूल खिला है’ गाया है। इसके अलावा उन्होंने 1988 में एक खास रचना ‘मिर्जा गालिब’ टीवी सीरियल का निर्देशन किया। इस सीरियल का प्रसारण दूरदर्शन पर हुआ था, जिसमें मिर्जा गालिब ने अभिनय किया था।

‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार से सम्मानित:

भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुये वर्ष 2004 में उन्हें देश के तीसरे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत किया गया। उर्दू भाषा में गुलजार की लघु कहानी संग्रह ‘धुआं’ को 2002 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है। भारतीय सिनेमा जगत में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये गुलजार जी को फिल्म इंडस्ट्री के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

5/5 (1)

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image