राजपथ पर ट्रंप को लाने की तैयारी

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Donald Trump

राज एक्सप्रेस भोपाल। भारत ने गणतंत्र दिवस परेड के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को मुख्य अतिथि बनने का न्योता दिया है। अगर ट्रंप इस न्योते को स्वीकार करते हैं, तो यह न सिर्फ मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी होगी, बल्कि दोनों देशों में संबंधों की नई इबारत भी खड़ी होगी।

भारत ने अगले साल गणतंत्र दिवस परेड के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मुख्य अतिथि बनने का न्योता दिया है। हालांकि भारत को अभी तक इस न्योते पर अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। ट्रंप ने अगर मुख्य अतिथि बनने पर हामी भरी तो यह दूसरा मौका होगा जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति भारत में गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि होगा। साल 2015 की गणतंत्र दिवस परेड में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मोदी सरकार के निमंत्रण को स्वीकार कर पहले मुख्य अतिथि बने थे। अगर डोनाल्ड ट्रंप भारत के इस न्योते को स्वीकार करते हैं तो यह कूटनीतिक स्तर पर मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी होगी। साल 2016 में अबुधाबी के शहजादे मोहम्मद बिन जायेद ने मुख्य अतिथि बनने का भारत का न्योता स्वीकार किया था। बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने इैरान से कच्चे तेल का आयात करने वाले देशों को प्रतिबंध की धमकी दी है। मोदी सरकार को उम्मीद है कि अमेरिका भारत को ईरान से संबंध रखने के बावजूद कुछ छूट दे सकता है। अभी क्रूड आयॅल को लेकर भारत और ईरान के संबंध खटास के दौर से गुजर रहे हैं।

दिवस भारत के 69वें गणतंत्र में आसियान के 10 देशों के नेताओं और शासनाध्यक्षों ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया था। इसमें आसियान देशों के नेताओं एवं राष्ट्राध्यक्षों में ब्रूनेई के सुल्तान हाजी-हसनल-बोल्किया मुइज्जाद्दीन वदाउल्लाह, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो, फिलीपीन के राष्ट्रपति रोड्रिगो रोआ डूतरेत, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन, सिंगापुर के पीएम ली सिएन लूंग, मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो स्री मोहम्मद नजीब बिन तुन अब्दुल रज्जाक, थाईलैंड के प्रधानमंत्री जनरल प्रयुत छान-ओ-चा, म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सांग सू ची, वियतनाम के प्रधानमंत्री नग्युएन जुआन फूक और लाओ पीडीआर के प्रधानमंत्री थोंगलोंन सिसोलिथ शामिल हुए थे। अब गणतंत्र दिवस के लिए ट्रंप को न्योता भेजने का मकसद  भारत और अमेरिका दोनों के हित में है। चुनाव जीतने के बाद ट्रंप को सबसे पहले बधाई देने वालों में पीएम मोदी भी शामिल थे। पद संभालने के बाद ट्रंप ने भी एशियाई देशों में सबसे पहले भारत से संपर्क साधा और फोन पर पीएम मोदी से बातचीत की।

अगर ट्रंप भारत के इस न्योते को स्वीकार करते हैं, तो यह तय है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच जो वादे होंगे, वह पहले हुई ओबामा यात्रा से भी ज्यादा नाटकीय होंगे। इस समय करीब-करीब दुनिया के हर बड़े देश के लिए ट्रंप के साथ अपने रिश्ते सामान्य रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। ट्रंप का गरम मिजाज और चिड़चिड़पना दुनिया के दूसरे नेताओं के लिए उनसे सामंजस्य बैठाने में चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में अगर भारत कुछ अलग हट कर सोच रहा है, तो यह अपवाद ही होगा। अब देखना है कि ट्रंप भारत के न्योते को स्वीकार कर कदम आगे बढ़ाते हैं या नहीं।

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