क्या आप जानतें हैं कि, हम आज जो कपड़ें पहन रहें उसे सीलने वाली मशीन (Sewing Machine) का अविष्कार किसने किया हैं। दरअसल कपड़े सीलने वाली मशीन का अविष्कार जिसने किया हैं, आज उनका जन्म दिन हैं और उस व्यक्ति का नाम एलायस होवे हैं। एलायस होवे (Elias Howe) का जन्म 9 जुलाई 1819 को हुआ था। एलायस होवे को आज दुनिया सिलाई मशीन के आविष्कारक के रूप में जानती है।

एलायस होवे का प्रारंभिक जीवन और परिवार

एलायस होवे का शुरुआती बचपन अमेरिका के मैसाचुसेट्स में बीता था और उन्होंने 1835 में टेक्सटाइल कंपनी जो कपड़ा कारखाना था वहां से बतौर प्रशिक्षु करियर की शुरुआत की। सन 1837 में वे मैसाचुसेट्स में कार्डिंग मशीनरी के साथ मैकेनिक के रूप में काम करने के लिए चले गए। एलायस होवे (Elias Howe) ने 1841 में ही साइमन एम्स और जेन बी एम्स की बेटी एलिजाबेथ जेनिंग्स एम्स से शादी कर ली थी। उनके तीन बच्चे थे- जेन रॉबिन्सन होवे, साइमन अमेस होवे और जूलिया मारिया होवे।

Elias Howe Sewing Machine का इतिहास

एलायस होवे ने 10 सितंबर 1846 में Sewing Machine को पेटेंट कराया था। इससे पहले प्रथम मशीन ए. वाईसेन्थाल ने 1755 ई. में बनाई थी। इसकी सूई के मध्य में एक छेद था और  दोनों सिरे नुकीले थे। फिर 1790 ई. में थामस सेंट ने दूसरी मशीन का आविष्कार किया। थामस सेंट के आविष्कार करने के बाद सन्‌ 1830 ई. में सिलाई मशीन का वास्तविक आविष्कार एक निर्धन दर्जी सेंट एंटनी निवासी बार्थलेमी थिमानियर ने फ्रांस में किया था।

फिर कई सालों बाद एलायस होवे (Elias Howe) के द्वारा बनाई गई सिलाई मशीन को सन्‌ 1846 में लॉकस्टिच डिजाइन के लिए पहले अमेरिकी पेटेंट पुरस्कार से नवाजा गया। लेकिन अमेरिका में कोई भी व्यक्ति इस मशीन को खरीदने के लिए तैयार नहीं हुआ। फिर होवे (Elias Howe) के भाई ने ब्रिटेन में इस मशीन को 250 पाउंड में बेचा दिया। उसके बाद उन्होंने सन्‌ 1851 में जिपर (पेंट में लगने वाली चेन) का आविष्कार कर उसे पेटेंट कराया। एलायस होवे का खून के थक्के के कारण मात्र 48 की आयु में ही निधन हो गया था।

भारत में 19 वीं शताब्दी में आई सिलाई मशीन

भारत में 19 वीं शताब्दी के अंत तक मशीन आ गई थी। इन मशीनों में 2 मुख्य मशीन थीं एक अमरीका की सिंगर और दूसरी इंग्लैंड की ‘पफ’ मशीन। फिर आजादी के बाद भारत में ही Sewing Machine का निर्माण होने लगा। भारत में जो मशीन बनी उसका नाम उषा हैं। यहां मशीन काफी विकसित हुई है। भारत में सन्‌ 1935 में कोलकाता के एक कारखाने में उषा नाम की पहली सिलाई मशीन का निर्माण हुआ। इस मशीन के पार्ट्स भारत में ही तैयार किय गए थे। लेकिन वर्तमान में कई प्रकार की सिलाई मशीनो का निर्माण भारत में किया जाता हैं और इन मशीनों को विदेशों में भी निर्यात किया जाता है।

Elias Howe, Sewing Machineकई प्रकार के कार्यों के लिए मशीनों का उपयोग किया जाता हैं

आज भारत में 2 हजार से अधिक प्रकार की मशीनें अलग-अलग कामों के लिए उपयोग में लाई जाती है। आज छोटे से छोटे और बड़े से बड़े कार्य मशीनों द्वारा ही किये जाते है। आज के आधुनिक युग में लोग पापड़ से लेकर हवाई जहाज बनाने तक मशीनों का ही इस्तेमाल करते हैं। कुछ मशीने हाथों के जरियें तो कुछ मशीनें बिजली के जरियें चलाई जाती हैं। Sewing Machine एक ऐसा यांत्रिक उपकरण है, जो किसी कपड़ें या अन्य चीज को परस्पर एक धागे या तार से सिलने के काम आती है।

सिलाई मशीन के रोचक तथ्य

यह जानकर सभी को आश्चर्य होगा कि सिलाई मशीन का अविष्कार एक सपने के कारण हुआ हैं। दरअसल हुआ यूँ कि, एलायस होवे (Elias Howe) को एक दिन सपना आया। उन्होंने सपने में देखा की उन्हें आदिवासियों ने पकड़ लिया हैं और वे उन्हें जलाने वाले हैं। उन्होंने यह भी देखा कि, उन आदिवासियों के पास कुछ सामान हैं, जिससे वे कुछ सील रहें होते हैं। सपने में आदिवासियों को कुछ सिलतें हुआ एलायस होवे ने देखा और उनके मन में Sewing Machine बनाने का विचार आया। इस सपने के कारण ही सिलाई मशीन का अविष्कार हुआ।

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