आइये जाने रतन टाटा ने कैसे अपने अपमान का बदला सफलता से लिया

0
54

आइये जाने रतन टाटा ने कैसे अपने अपमान का बदला सफलता से लिया कई बार आपने लोगों को कहते सुना होगा कि, देखना अपने अपमान का बदला ऐसे लूंगा याद रखेगा। लेकिन क्या? कभी आपने किसी को अपने अपमान का बदला अपनी सफलता के द्वारा लेते देखा है? अगर नहीं देखा तो, आइये आज आपको एक ऐसे सख्स के बारे में बताते है, जिन्होंने अपने अपमान का बदला अपनी सफलता से लिया। यह सख्स और कोई नहीं बल्कि “रतन टाटा” (Ratan Tata) है। हम आपको बताते है कौन है रतन टाटा और कैसे इन्होने अपने अपमान का बदला अपनी सफलता द्वारा लिया। आइये उस हम उस घटना की बात करते है, जिसमे रतन टाटा ने अंग्रेजी की कहावत “Success is the best revenge” (सफलता ही सबसे अच्छा बदला है। ) को सच कर दिखाया।

कौन है रतन टाटा (Ratan Tata):

रतन टाटा का पूरा नाम रतन नवल टाटा है, इनका जन्म 28 दिसंबर 1937, को मुम्बई, में हुआ था। यह (TATA) टाटा समुह के अध्यक्ष है। जो कंपनी चुटकी भर नमक से लेकर बड़ी-बड़ी कारे तक बनाती हैं। इस कंपनी की स्थापना जमशेदजी टाटा ने की थी, जो रतन टाटा के दादाजी है। रतन टाटा को 1991 में टाटा समूह का चैयरमेन बना दिया गया था। इसके बाद 1971 में रतन टाटा को राष्ट्रीय रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी लिमिटेड (नेल्को) का डाईरेक्टर-इन-चार्ज नियुक्त किया गया था। रतन टाटा की कंपनी कई सेक्टरों में भाग ले चुकी है। इनमे से एक Tata Motors भी है।

कैसे हुआ रतन टाटा का अपमान:

रतन टाटा ने 1998 में Tata Motors की Indica कार लांच की थी, जो उनका एक ड्रीम प्रोजेक्ट भी था। उस प्रोजेक्ट पर बहुत मेहनत के बाद भी कुछ खाश रिस्पांस नहीं मिला। जिससे Tata Motors कंपनी को घाटा हुआ और कंपनी के शेयरहोल्डरों ने कंपनी को बेचने का सुझाव दिया। मन न होते हुए भी रतन टाटा कंपनी को बेचने के लिए तैयार हो गए। वे अपने शेयरहोल्डरों के साथ अपनी कंपनी को बेचने का प्रस्ताब लेकर Ford कंपनी के हेड क्वाटर अमेरिका पहुंचे। वहाँ Ford कंपनी के साथ रतन टाटा और उनके शेयरहोल्डरों की 3 घंटे की मीटिंग के दौरान फोर्ड के चैयरमेन विल फोर्ड ने रतन टाटा से बहुत ही बदसलूकी की और कहा-“जब तुम्हे इस बिजनेस का कोई ज्ञान नहीं था तो, तुमने इस कार को लांच करने में इतना पैसा क्यों लगाया हम तुम्हारी कंपनी को खरीद कर तुम पर ऐसान कर रहे है।”

कैसे लिया बदला:

Ford कंपनी के द्वारा हुए अपमान के बाद रतन टाटा डील को अधूरा छोड़ कर अपने शेयरहोल्डरों के साथ वापस आ गये। वह विल फोर्ड की बातो को भूल नहीं पा रहे थे, तब उन्होंने अपनी Tata Motors कंपनी को किसी को भी न बेचने का फैसला किया। उन्होंने फिर से अपनी कंपनी में जी जान से मेहनत करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उसी कंपनी का बिजनेस इतनी तेजी से बढ़ा और कंपनी को बहुत फायदा हुआ और दूसरी तरफ 2008 तक Ford कंपनी घाटे के कारण दिवालिया होने की कगार पर आगई। उस समय रतन टाटा ने उनकी लग्जरी कार लेंड रोवर और जगुआर खरीदने का प्रस्ताव रखा, जिसके कारण कंपनी घाटे में गई थी, तब विल फोर्ड अपने शयरहोल्डरों के साथ उसी तरह टाटा समूह पहुंचे, तब विल फोर्ड ने रतन टाटा से कहा-“आप हमारी कंपनी खरीद कर हम पर बहुत बड़ा ऐसान कर रहे है।”

रतन टाटा और उनकी कंपनी से जुड़े कुछ बिंदु:आइये जाने रतन टाटा ने कैसे अपने अपमान का बदला सफलता से लिया

  • रतन टाटा ने लग्जरी कार लेंड रोवर और जगुआर ब्रांड की डील 9300 करोड़ में पूरी की थी।
  • लेंड रोवर और जगुआर ब्रांड आज टाटा समूह का हिस्सा है।
  • रतन टाटा को 2 बार पद्मभूषण पुरुष्कार से नवाजा गया है।
  • रतन टाटा के बिजनेस 100 देशो में फैला हुआ है।
  • टाटा चाय, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स भी टाटा समूह के ही हिस्से है।
  • टाटा कंसल्टेंसी की शुरुआत रतन टाटा की देखरेख में ही हुई थी।
  • रतन टाटा अपने समूह के मुनाफे का 66% का हिस्सा चैरिटी में दान करते है।
  • इस समूह में साढ़े 6 लाख लोग काम करते है।
5/5 (3)

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image