वाराणसी हादसे से सीखें सबक

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Varanasi Incident

राजएक्सप्रेस,भोपाल। Varanasi Incident: प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में बड़ा हादसा होने से 18 लोगों की जान चली गई, लेकिन इस हादसे सबक लेने के बजाय प्रशासन के अधिकारी अब लीपापोती में जुट गए हैं। इस तरह के हादसे पहले भी हुए हैं, मगर हमने कोई सबक नहीं सीखना जरूरी नहीं समझा।

Varanasi Incident: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में बड़ा हादसा होने से 18 लोगों की जान चली गई, लेकिन इस हादसे सबक लेने के बजाय प्रशासन के अधिकारी लापरवाही बरतते रहे। उन्होंने न सिर्फ सीएम योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया बल्कि आम इंसान की जिंदगी भी दांव पर लगा दी है। घटना के बाद भी प्रशासन की लापरवाही बदस्तूर जारी रही। पोल्स पर रखे हुए बीम को न ही आपस में जोड़ा गया था और न ही उन्हें जाम किया गया था। मौके की जांच करने पर पांच खंभों पर 25 बीम उसी हालत में बिना बांधे रखे हुए दिखाई दिए। लापरवाही का आलम यह कि देर रात जब सीएम योगी आदित्यनाथ मौके की जांच के लिए पहुंचे तो उन्हें भी इन्हीं खतरनाक हालात में ही घटनास्थल पर ले जाया गया। प्रशासन ने बिना उनकी सुरक्षा की परवाह किए ही उन्हें वहां पर मुआयना कराया। इस दौरान न तो मुख्यमंत्री किसी तरह का प्रोटेक्टिव गियर पहने हुए थे और न ही प्रशासन के अधिकारी। इससे पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने भी इन्हीं खतरे भरे हालात में इस जगह का जायजा लिया था।

बता दें कि मंगलवार को हादसे के बाद जब राहत और बचाव कार्य चल रहा था तभी फ्लाईओवर तैयार करने के लिए बनाए गए अन्य पिलर्स में कंपन हो रहा था। इसके निर्माण के लिए लगाई गई शटरिंग भी टूट कर गिर गई थी, जिसकी चपेट में आते-आते कई लोग बचे थे। कुल मिलाकर चौकाघाट फ्लाईओवर हादसा लापरवाही और प्रशासनिक चूक के कारण हुआ है। इसका निर्माण शुरू होने से ही यहां लगातार सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती रही है। सेतु निगम की निगरानी में इसका निर्माण सितंबर-2015 से शुरू कराया गया है। मार्च-2019 में इसे पूरा करना था लेकिन वाहनों के दबाव का हवाला देकर काम को अक्टूबर-2019 में पूरा करने की मियाद बढ़ाई गई थी। कई बार प्रशासन को चेताया गया कि रूट डायवर्जन करके यहां निर्माण कराया जाए नहीं तो हादसा हो सकता है। हर समय इस मार्ग पर आवाजाही के बावजूद फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान न तो रूट डायवर्ट किया गया और न ही सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया। ताक पर सुरक्षा मानकों को रखकर हो रहे निर्माण में तकनीकी दिक्कत के चलते हादसा हुआ है।

जानकारों की मानें तो जहां इस तरह का निर्माण होता है, उस पूरे इलाके को सील कर दिया जाता है। निर्माण कार्य से चार चार फीट दाएं-बाएं बैरिकेडिंग की जाती है। आवागमन को सीमित कर दिया जाता है। वहां लाल झंडे और लाल लाइट लगाई जाती हैं। यहां ऐसा सुरक्षा मानक नहीं थे। यही नहीं, जहां वाहनों का दबाव अधिक होता है, वहां रात में काम कराया जाता है। नियमानुसार दिन में काम वहीं कराना चाहिए, जहां जगह मिलती हो और किसी की जान के लिए खतरा न हो। लेकिन वाराणसी में सतर्कता के एक भी उपाय नहीं किए गए। अब जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।

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