संस्कृत चली सात समंदर पार

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Sanskrit Language

राजएक्सप्रेस,भोपाल। हाल ही में पूर्वी यूरोप के राष्ट्र यूक्रेन के युवक-युवतियों का एक 14 सदस्यीय ग्रुप वाराणसी के शिवाला में संस्कृत सीखने आया है। इन युवक-युवतियों में रियल स्टेट के कारोबारी, डॉक्टर तथा शिक्षक शामिल हैं। कई और देशों में भी संस्कृत भाषा (Sanskrit Language) को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। भारत के संदर्भ में देखें, तो यह भाषा अपने ही घर में बेगानी होती जा रही है। जरूरत है कि हम भी इस भाषा के प्रति अपना रुझान दिखाएं।

संस्कृत भाषा (Sanskrit Language) को देवभाषा भी कहा जाता है। इसकी उत्पत्ति प्राकृत भाषा से हुई। माना जाता है कि जो व्यक्ति संस्कृत पूरी तरह सीख लेता है, वह दुनिया की कोई भी कठिन से कठिन भाषा आसानी से सीख सकता है। अब भारत के लिए गर्व की खबर यह है कि संस्कृत सात समंदर पार जा रही है। हाल ही में पूर्वी यूरोप के राष्ट्र यूक्रेन के युवक-युवतियों का एक 14 सदस्यीय ग्रुप वाराणसी के शिवाला में संस्कृत सीखने आया है। इन युवक-युवतियों में रियल स्टेट के कारोबारी, डॉक्टर तथा शिक्षक शामिल हैं। सौ से अधिक घाटों के शहर वाराणसी (जिसे हिंदू धर्म में पवित्रतम नगर बताया गया है) में इस समय 70 अलग-अलग देशों के 190 छात्र संस्कृत का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। कुछ साल पहले तक यह आंकड़ा 40 से 50 ही होता था, लेकिन वर्तमान में केवल अमेरिका के 35 छात्र यहां संस्कृत सीख रहे हैं। इसके अलावा म्यांमार, कोरिया, श्रीलंका तथा थाइलैंड के छात्र भी वाराणसी में अध्ययन करते देखे जा सकते हैं। वाराणसी में आने वाले विदेशी युवाओं को सर्टिफिकेट या डिप्लोमा कोर्स के बजाय तीन साल की डिग्री लेना ज्यादा पसंद है। इन युवाओं के अनुसार जो संस्कार और संस्कृति संस्कृत भाषा में है वह दुनिया की किसी अन्य भाषा में नहीं है। काशी के शिवाला स्थित वाग्योग चेतना पीठ के प्रो. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ने एक ऐसी विधि तैयार की है कि बिना रटे सिर्फ 180 घंटे में कोई भी संस्कृत भाषा सीख सकता है। संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है इसलिए लंदन और आयरलैंड के कई स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य विषय बना दिया है।

गौरतलब है कि हमारे पौराणिक ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि संस्कृत में दुनिया की सभी भाषाओं से सबसे ज्यादा शब्द हैं। वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द हैं। संस्कृत किसी भी विषय के लिए खजाना है। जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से ज्यादा शब्द हैं। खास बात यह है कि किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत में सबसे कम शब्दों में वाक्य पूरा हो जाता है। सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार भी था जो 1970 में शुरू हुआ था। आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध है। जर्मनी की टॉप यूनिवर्सिटी में से 14 यूनिवर्सिटी संस्कृत पढ़ाती हैं, जबकि ब्रिटेन में चार यूनिवर्सिटी संस्कृत के कोर्स कराती हैं। इस यूनिवर्सिटी के संस्कृत के हेड प्रो. एक्सेल माइकल के अनुसार, अगस्त महीने में शुरू होने वाला समर कोर्स एक महीने चलता है। इसमें पूरी दुनिया के छात्र आवेदन करते हैं। वे कहते हैं कि अब तक 34 देशों के 254 छात्रों ने इस कोर्स में हिस्सा लिया है। हीडेलबर्ग यूनिवर्सिटी के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट संस्कृत की भारी मांग के बाद स्विट्जरलैंड, इटली सहित भारत में भी स्पोकन संस्कृत का समर स्कूल शुरू करने जा रहा है।

कर्नाटक राज्य के शिवामोगा जिले का एक छोटा-सा गांव मत्तूर है जहां की मातृभाषा कन्नड़ है फिर भी वहां के सभी लोग संस्कृत में बात करते हैं, फिर चाहे वह 5 या 6 साल का बच्चा हो या 85 साल का वृद्ध। इस गांव में बच्चों को 10वें साल में वेदों का शिक्षण दिया जाता है। इस विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार संस्कृत सीखने में छात्रों को गणित और तर्क के लिए योग्यता भी विकसित करने में मदद मिलती है। मत्तूर के कई युवा विदेशों तक में इंजीनियरिंग तथा चिकित्सा के अध्ययन के लिए गए हैं। इस गांव के हर परिवार में से कम से कम एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनता है। एक और दिलचस्प बात यह है कि मत्तूर गांव के घरों की दीवारों पर संस्कृत गै्रफिटी पाई जाती है। दीवारों पर पेंट किए गए प्राचीन स्लोगन्स जैसे ‘मार्गे स्वच्छताय विराजाते, ग्राम सुजानाह विराजन्ते पाए जाते हैं।’ इसका अर्थ है सड़क के लिए स्वच्छता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना की अच्छे लोग गांव के लिए। कुछ घरों के दरवाजों पर ‘आप इस घर में संस्कृत बोल सकते हैं’ बड़े गर्व से लिखा होता है।

एक रोचक खबर यह भी है कि भोपाल का 10 सदस्यीय ‘ध्रुव रॉक बैंड’ है। यह संस्कृत को क्लासिकल और वेस्टर्न म्यूजिक के साथ तैयार कर रहा है। इस बैंड को बनाने वाले डॉ. संजय त्रिवेदी कहते हैं कि ‘हमारा मकसद संस्कृत को आम भाषा बनाना है। इसे कुछ लोगों ने कुछ विशेष लोगों के लिए बना दिया था। समय के साथ हम संस्कृत को आसान नहीं बना पाए। अब हमारी कोशिश इसे आम लोगों तक पहुंचाने की है। वे कहते हैं कि पहले परफामेंस में ही लोगों ने इसे पसंद किया। नासा से अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले प्रक्षेपण यान में अगर किसी अन्य भाषा का प्रयोग किया जाए तो अर्थ बदलने का खतरा रहता है लेकिन संस्कृत के साथ ऐसा नहीं है। क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे हो जाने पर भी अपना अर्थ नहीं बदलते। माना जाता है कि संस्कृत के पहले श्लोक की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। महर्षि वाल्मीकि ने काव्य रचना की प्रेरणा के बारे में खुद लिखा है कि वे क्रौंच पक्षी के मैथुनरत जोड़े को निहार रहे थे। वो जोड़ा प्रेम में लीन था। तभी उनमें से एक पक्षी को किसी बहेलिया का तीर आकर लगा। उसकी वहीं मृत्यु हो गई। ये देख महर्षि बहुत ही दुखी और क्रोधित हुए। इस पीड़ा और क्रोध में अपराधी के लिए महर्षि के मुख से एक श्लोक फूटा जिसे संस्कृत का पहला श्लोक माना जाता है।

हॉलीवुड की कुछ सेलिब्रिटी ऐसी हैं, जिन्होंने संस्कृत के टैटू बनवा रखे हैं। एंजोलिना जोली ने अपने पहले बच्चे के लिए संस्कृत में टैटू बनवाया था जिसका अर्थ है तुम्हारे दुश्मन तुमसे दूर रहें, तुम खूब आगे बढ़ो, तुम हमेशा अप्सरा की तरह दिखो। एडम लेदिन ने अपनी चेस्ट पर तपस लिखवा रखा है जिसका अर्थ मेडीटेशन होता है। कैटी पैरी ने अपने शरीर पर संस्कृत शब्द लिखवा रखे हैं जिसका मतलब है गो विथ द फ्लो। जेसिका अल्वा ने अपनी कलाई पर संस्कृत शब्द पद्मा लिखा रखा है। ब्रिटनी ने अपनी एड़ी पर संस्कृत शब्द अभय लिखवा रखा है जिसका मतलब है जो डरता ना हो। वाराणसी के वकील श्यामजी उपाध्याय 38 सालों से अपनी दलीलें संस्कृत में ही पेश करते आ रहे हैं। हर साल संस्कृत दिवस धूमधाम से मनाने वाले श्यामजी कहते हैं कि वे देश के इकलौते वकील हैं जो कोर्ट में संस्कृत में केस लड़ते हैं। 2003 में श्यामजी को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने संस्कृत भाषा में उनके इस योगदान के लिए उन्हें ‘संस्कृतमित्रम्’ नामक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। सोलहवीं लोकसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन खबरों में संस्कृत ही रही थी। भाजपा के कई सांसदों ने संस्कृत में शपथ ली थी।

अमेरिकन हिंदू यूनिवर्सिटी के मुताबिक संस्कृत में बात करने वाला मुनष्य बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्राल आदि रोगों से मुक्त हो सकता है। संस्कृत में बात करने से मानव शरीर का तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है जिससे व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश के साथ सक्रिय हो जाता है। इतना ही नहीं संस्कृत स्पीच थैरेपी में भी मददगार है। यह एकाग्रता को भी बढ़ाती है। नवाबों के शहर लखनऊ की एक सब्जी मंडी जो निशातगंज में है वहां संस्कृत भाषा में सब्जियां बिकती हैं। सभी सब्जियों के नाम संस्कृत में लिखे हैं। संस्कृत में हर जगह बोर्ड भी लगे हैं। यहां के लोगों का कहना है कि संस्कृत हमारी मुख्य भाषा है। संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए यह मुहिम चलाई जा रही है।
रेणु जैन (स्वतंत्र टिप्पणीकार)

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