Mark Zuckerberg ने US सीनेट में Facebook Data Leak पर मांगी माफ़ी 

Mark Zuckerberg: विश्व की जानी-मानी लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक (Facebook) सभी तरफ से Data Leak के विवादो मै घिरी हुई थी। इस बात को फेसबुक के सीईओ Mark Zuckerberg ने स्वीकार भी किया था। अब इस Data Leak मामले पर मार्क जकरबर्ग ने US सीनेट में माफ़ी मांगते हुए, भारत में होने वाले चुनावों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। कहा है कि, ‘भारत में आने वाले चुनावों में फेसबुक की पूरी तरह से सावधानी रखी जाएगी। FB Data Leak होने की खबर पर सीईओ मार्क जकरबर्ग अपनी सफाई पहले भी दे चुके है। जकरबर्ग, बीते हुए 2 महीने से लाखों फेसबुक यूजर्स एवं राजनेताओं की आलोचना का शिकार हो रहे थे। कैंब्रिज एनालिटिका के पूर्व कर्मचारी क्रिस्टोफर वायली ने ब्रिटिश संसद में FB Data Leak मामले को लेकर राज खोला था।

US सीनेट में Facebook के सीईओ Mark Zuckerberg ने कहा

अमेरिकी कांग्रेस के सामने Facebook के सीईओ Mark Zuckerberg ने US सीनेट में कहा, ‘2018 पूरे विश्व के लिए बेहद अहम वर्ष है। भारत और पाकिस्तान जैसे कई देशों में चुनाव होने है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे कि यह चुनाव सुरक्षित हो। अरबपति जकरबर्ग ने कहा कि, ‘वर्ष 2016 में हुए अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने वाली रूस की गड़बड़ी को देर से पकड़ा। जिसका फायदा डोनाल्ड ट्रम्प को मिला। आज वह अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति हैं। सीनेट के सामने अपनी बात रखते हुए Mark Zuckerberg ने माफ़ी मांगी और यह भी स्वीकार किया कि Data Leak के लिए फेसबुक जिम्मेदार है।’

पहले भी Mark Zuckerberg माफ़ी मांग चुके है

गौरतलब है कि पहले भी कई बार जकरबर्ग माफ़ी मांग चुके है। परंतु पहली बार उन्होंने US सीनेट में अमेरिकी सांसदों के सामने हुई पेशी में, अफसोस जताते हुए माफ़ी मांगी है। सुनवाई में जकरबर्ग ने अपनी कम्पनी में लोगों को भरोसा दिया है। उन्होंने कहा है कि, ‘हमने अपनी जिम्मेदारियों पर पर्याप्त रूप से बड़ा नजरिया नहीं अपनाया और यह बड़ी भूल थी। मैंने फेसबुक शुरू किया, मैंने इसे चलाया और यहां जो कुछ हुआ, इसके लिए मैं जिम्मेदार हूं।

गौरतलब है कि, हाल ही में Facebook से करीब 5 करोड़ से अधिक यूजर्स का Data Leak हुआ है। US  में करीब 5-6 करोड़ का डाटा चोरी होने के आरोप में Facebook ने 16 मार्च 2018 को कैंब्रिज एनालिटिका को बैन कर दिया। अभी तक करीब 30 करोड़ का डाटा चोरी हो चुका है।

जकरबर्ग ने रोहिंग्याओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर भी माफ़ी मांगी

गत सप्ताह में म्यांमार के एक एक्टिविस्ट ने Facebook के सीईओ को खुली चिट्ठी में नाराजगी जाहिर की थी। उसके रिप्लाय में Mark Zuckerberg ने माफ़ी मांगी है। जकरबर्ग ने माफ़ी मांगते हुए, म्यांमार में नफरत भरे बयानों से निपटने के लिए कदम उठने की बात कही है। यूएन के जांचकर्ताओं ने भी रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ हो रही हिंसा, एंटी मुस्लिम स्पीच और फेक न्यूज के लिए Facebook की बड़ी भूमिका बताई है। Mark Zuckerberg ने अपने ईमेल में लिखा कि, ‘Facebook ने बर्मी भाषा के दर्जनों समीक्षक इस नफरत भरी स्पीच पर नजर रखने के लिए रख रखे हैं। जकरबर्ग ने कहा कि, ‘म्यांमार सम्बन्धित मामलों पर नजर रखने के लिए कम्पनी ने कई लोगों को हायर किया है, जिसमे एक प्रोडक्ट टीम भी शामिल है, जो वहां हिंसा को रोकने के लिए काम कर रही है।’

सिविल सोसायटी ऑर्गनाइजेशन का Facebook पर आरोप

सिविल सोसायटी ऑर्गनाइजेशन का आरोप है कि, उनके देश में हिंसा और नफरत फ़ैलाने में Facebook की सबसे बड़ी भूमिका है, जिसके कारण देश के कई शहरों में तनाव है। सोसायटी ने यह भी कहा है कि, फेसबुक म्यांमार में जातीय हिंसा को रोकने में मदद करने के लिए कई वादों का इतिहास रहा है, परन्तु वह सदैव नाकाम रहा है।
रविशंकर प्रसाद ने कहा जकरबर्ग ने अपनी गलती मानी अब राहुल भी देश से माफ़ी मांगे।

रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया अब जब कैंब्रिज एनालिटिका के चुनावों में दखल देने की बात सच साबित हो गई है, फेसबुक ने कहा है कि, ‘वह कोशिश करेगा कि इसका भारत के चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को माफ़ी मांगनी चाहिए और वादा करना होगा कि, वह वोटर्स को प्रभावित नहीं करेंगे और समाज को बांटने की कोशिश नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि, कैंब्रिज एनालिटिका के पूर्व कर्मचारी क्रिस्टोफर वायली ने डाटा लीक मामले में कई खुलासे किये थे, जिसमे उन्होंने कई पार्टियों के साथ ही कांग्रेस पार्टी का भी नाम लिया था। उन्होंने कहा था कि, ‘उसे पूरा विश्वास है कि कैंब्रिज एनालिटिका की एक क्लाइंट कांग्रेस भी थी। कम्पनी ने पार्टी के लिए हर तरह के प्रोजेक्ट पर कार्य किया।‘
कैंब्रिज एनालिटिका के निलंबित सीईओ अलेक्जैंडर निक्स के लन्दन स्थित ऑफिस में, कांग्रेस का पोस्टर दीवार पर चिपके होने की बात सामने आई थी। जिसको लेकर काफी हंगामा हुआ था।

Facebook की लापरवाही को लेकर लोगों की प्राइवेसी पर हमला हुआ था। उसको लेकर संसार भर के नाराज लोगों ने डिलीट फेसबुक नामक अभियान भी चलाया।

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