Trade War : अमेरिका ने रूस और चीन के व्यापारियों एवं अधिकारियों पर लगाया प्रतिबन्ध

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वॉशिंगटन। ट्रेड वॉर (Trade War) के चलते अमेरिका, रूस और चीन के बीच लगातार दूरियां बढ़ती जा रही है। अपने व्यापार को बचाने के लिए अमेरिका, चीन के ऊपर लगातार टैरिफ लगा रहा है, वहीं चीन भी अमेरिका को जवाब देने में पीछे नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दामाद समेत कई व्यापारियों एवं अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन सभी पर रूस की सरकार के पश्चिमी देशों को नजरअंदाज करने के प्रयास से लाभ उठाने का आरोप है।

ट्रेड वॉर को लेकर अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने किया बड़ा ऐलान

अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने शुक्रवार का ऐलान किया, डिपार्टमेंट ने 17 सरकारी अधिकारियों समेत कई कंपनियों पर भी प्रतिबन्ध लगाया है। इस कार्यवाही का लक्ष्य रूस के व्यापारी किरिल शामालोव भी हैं। जो पुतिन की बेटी के पति हैं और 2013 में विवाह करने के बाद उन्होंने अपार धन कमाया है। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के सेक्रेट्री स्टीवन टी. मनुचिन ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा है क़ि, ‘रूस की सरकार व्यापारियों और सरकारी उद्यमों के असीमित लाभ के लिए काम करती है।’ जानकारी है कि, हथियारों के कारोबार से जुडी रूस की सरकारी कम्पनी रोसोबोरोनेक्सपोर्ट का सीरिया के साथ लम्बे समय से सम्बन्ध है। उसके सहायक रुसी फाइनेंशियल कार्पोरेशन बैंक को भी नए प्रतिबंध का निशाना बनाया गया है।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा है कि, ‘इन प्रतिबन्धों का मतलब यह नहीं है कि, अमरीका ने रूस से अपने रिश्ते खत्म कर लिए हैं। उन्होंने कहा, ‘आज ये जो प्रतिबंध लगाए हैं और साथ ही जो भी प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं, उनमें कांग्रेस की मंजूरी का ध्यान रखा गया है। यह साबित करता है कि, राष्ट्रपति की बात बिलकुल सही थी कि, कोई रूस पर कठोर कदम नहीं उठता था।’ सारा सैंडर्स ने कहा, ‘हम रुसी सरकार के साथ सकारात्मक रिश्ता चाहते हैं लेकिन यह तभी हो सकेगा जब उनकी तरफ से भी व्यवहार में बदलाव आए। अमेरिका की तरफ से लगाए गए प्रतिबन्धों के जवाब में रूस ने भी कड़े कदम उठाने की धमकी दी है।’

इससे पहले भी अमेरिका ने रूस के खिलाफ की थी कार्यवाही

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ एक और बडी कार्यवाही की थी। जिसमे अपने अमेरिका से 60 रुसी राजदूतों को निकाल दिया था। इस कार्यवाही के बाद से ही विश्व के दो बडे सुपर पॉवर देशों के बीच शीतयुद्ध की स्थिति निर्मित हो गई है। एक-दूसरे पर इस तरह टैरिफ लगाने की इस स्थिति में भले ही दोनों देश अपने को सबसे आगे मान रहे है। परन्तु इससे अन्य देशों की व्यापारिक स्थिति पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। वहीं चीन भी अमेरिका को मुहतोड़ जवाब देने की बात कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि, Trade war से विश्व की इकनॉमिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

Trade war पर अमेरिका के खिलाफ रूस और चीन का साथ

Trade war पर जहां अमेरिका और रूस एक दूसरे के खिलाफ नजर आ रहें है, वहीं इस लड़ाई में चीन, रूस का साथ दे रहा है। कुछ वर्षों पहले रूस एवं चीन के सबंध कुछ ठीक नहीं रहे है। परन्तु अब अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के खिलाफ दोनों एक हो गए है। कई मामलों में चीन एवं रूस अमेरिका के खिलाफ हैं। जिसमें वर्तमान में Trade war से लेकर इकनॉमिक प्रतिबंध, उत्तर कोरिया और सीरिया जैसे मामले शामिल है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से चीन और रूस एक-दूसरे के करीब आ गए है, और अपने आपसी और व्यापारिक सबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहें है। इसी कड़ी में वर्तमान में Trade war पर अमेरिका के खिलाफ खड़े है।

विवाद की शुरुआत

गुजरे हुए मार्च के महीने में, ब्रिटेन में रूस के पूर्व जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी पर, रासायनिक हमला हुआ था। इसके बाद से ही इस विवाद की शुरुआत हुई थी। इस हमले का आरोप रूस ने ब्रिटेन पर लगाया था। उसके बाद ही ब्रिटेन ने 23 रुसी राजनयिकों को निकाल दिया था, और रूस ने भी उतने ही ब्रिटेन के राजनयिकों को निष्कासित करने की घोषणा कर दी थी। फिर ब्रिटेन का समर्थन 20 से भी अधिक देशों ने किया, जिसमे अमेरिका भी शामिल था। तब रूस ने भी अमेरिका के कुछ राजनयिकों को निकाला था। देखना यह है कि, इस विवाद का पूरे विश्व में क्या असर हो सकता है। लेकिन आपसी सामंजस्य से यह विवाद थम भी सकता है।

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