लीबिया में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामले बड़ी चुनौती: हुसैन

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संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त जैद राड़ अल हुसैन ने कहा है कि लीबिया में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले काफी गंभीर है और मनमाने ढंग से गिरफ्तारी, अत्याचार तथा अन्य गंभीर अपराधों पर रोक लगाने के लिए सरकार को काफी कुछ करना है। हाल ही में लीबिया से लौटे श्री हुसैन ने कहा है कि लीबिया सरकार इस मामले में बहुत कुछ कर सकती है और उसे कर दिखाना चाहिए। कल अपनी यात्रा को ख़त्म करने के बाद जारी एक बयान में उन्होंने कहा है कि लीबिया में मुआम्मर गद्दाफी के समय से ही मानवाधिकारों की स्थिति अच्छी नहीं थी और उस सरकार के अंत के बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है तथा किसी भी संयुक्त राष्ट्र मिशन ने इस दौरान वहां की यात्रा नहीं की है।
उन्होंने अपनी एक दिवसीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री फैयाज सिराज और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से बातचीत की थी। तथा देश की बड़ी जेल और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को रखने के लिए बनाए गए शिविर का भी दौरा किया है। दरअसल लीबिया में वर्ष 2011 की क्रांति के बाद जनता में काफी उम्मीदें जगी थी कि शायद अब स्थितियों में कुछ सुधार होगा लेकिन हालात पहले जैसे ही हैं। हजारों लोगों को अभी भी मनमाने ढ़ंग से गिरफ्तार किया जाना आम बात है और ऐसे लोग देश की अनेक जेलों में सड़ रहे हैं।
अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने पाया है कि सुरक्षा बल नागारिकों और विरोधी समूहों को मनमाने तरीके से कैद में रख रहे हैं और उनकी हत्याएं भी कर रहे हैं और इस तरह की घटनाएं प्रत्येक हफ्ते हो रही है। सुरक्षा बलों की इस तरह की कार्रवाई देश में स्थिरता के प्रयासों की दिशा में काफी बाधक है और इससे विकास भी बाधित हो रहा हैं।
उन्होंने बताया है कि लीबिया में मानवाधिकार मामलों से जुड़ी चुनौतियां काफी व्यापक हैं लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इनसे निपटा ही नहीं जा सकता है। न्यायपालिका में बड़े पैमाने पर तंत्र का ध्वस्त होना, सुरक्षा बलों का मनमाने तरीके से काम करना मानवाधिकारों के उल्लंघन को काफी बढ़ावा दे रहा है लेकिन सरकार अगर इच्छा शक्ति दिखाए तो इनसे निपटा जा सकता है।

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