राफेल सौदे में मोदी सरकार ने नियमों को रखा ताक पर : कांग्रेस

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर राफेल (Rafael) लड़ाकू विमान खरीद सौदे में सभी नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगाते हुए आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्योगपति मित्र के लिए देश की सुरक्षा से तो समझौता किया ही है साथ ही इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचेगा और इस सौदे से घोटाले की बू आ रही है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यहां आयोजित विशेष संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री मोदी ने दो साल पहले फ्रांस यात्रा के दौरान रक्षा खरीद नियमों की परवाह किए बिना 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद की मंजूरी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सौदे में किसी भी तरह की पारदर्शिता नहीं थी और इस मौके पर न तो रक्षा मंत्री मौजूद थे और न ही इसके लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति तथा अन्य एजेन्सियों की मंजूरी ली गयी।

इस सौदे में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने वर्ष 2012 में फ्रांस से मात्र 54000 करोड़ रूपये की लागत से 126 राफेल विमान खरीदने का सौदा किया था और इसमें भारतीय एयरोस्पेस कंपनी हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए भी समझौता किया गया था। लेकिन मोदी सरकार ने बिना प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के प्रावधान के ही केवल 36 विमान 60 हजार करोड रूपये की भारी भरकम राशि में खरीदने को मंजूरी दी। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने सवाल किया कि मोदी सरकार ने नियमों की परवाह किए बिना और पारदर्शिता को ताक पर रखकर किस आधार पर इस सौदे के बारे में एकतरफा निर्णय लिया।

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