तीन दशकों में ही दम तोड़ने लगी ATM मशीन

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ATM का नाम तो आप सब ने सुना ही होगा। ATM का मतलब है, ऑटोमेटिक टेलर मशीन। जिस तरह से सरकार डिजिटलीकरण की तरफ आगे बढ़ रही है, उसको देख कर ऐसा लगता है, आने वाले समय में ATM मशीन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। कहा एक समय था, जब लोग पेमेंट के नाम पर ATM को याद करते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट प्रचलन में आ गया है। जिसके कारण अब लोग ATM के इस्तेमाल के बारे में सोचते भी नहीं है।
ATM के अस्तित्व पर सवाल?:
किसी ने सोचा नहीं था कि ATM जैसी प्रतिष्ठित ATM मशीन अपनी प्रतिष्ठा खोने लगेगी। आज से 5 साल पहले प्रचलन में चल रही ATM मशीन का अस्तित्व ख़त्म होता नजर आ रहा है। इसका कारण बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बदलावों का होना है। आज हर जगह डिजिटल ट्रांजेक्शन का बोल बाला है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोग ATM मशीन का जिक्र सिर्फ इतिहास की किताबो में ही करेंगे।
ATM मशीन- इतिहास से वर्तमान तक:
दुनिया की पहली एटीएम मशीन सन 1967 में बर्कले बेक्स ने लंदन में स्थापित की थी। हमारे देश में उसके 20 साल बाद 1987 में HSBC बैंक द्वारा पहली ATM मशीन स्थापित की गई। आपकी जानकारी के लिए बता दे उसके बाद शुरुआत में सबसे ज्यादा ATM मशीन Citi बैंक के द्वारा स्थापित किये गए थे। उसके बाद ATM मशीन का जो दौर शुरू हुआ एक के बाद एक बैंक ATM मशीन स्थापित करते चले गए। HDFC, Axis और ICICI बैंक ने तो ATM मशीन स्थापित करने का अभियान तक चलाया था। इसी तरह ATM मशीन स्थापित करने की प्रतिष्पर्धा बढ़ती चली गई और पूरे देश में लाखो ATM स्थापित हो गए। इस दौर में केश रखना बहुत ही आसान हो गया था। हर थोड़ी दूर पर एक न एक ATM मशीन जरूर पाई जाती थी। इस बहाने बैंक अपनी बैंकिंग सुविधा 24X7 प्रदान करने में कामयाब हो गए थे और एक छोटे से प्लास्टिक के कार्ड से केश रखना इतना आसान हो गया था। 2012-13 में एटीएम मशीन की संख्या 1 लाख 10 हजार के आसपास पहुंच गई थी और 2016-17 तक ये संख्या जस्ट दुगनी 2 लाख 20 हजार तक पहुंच गई। पिछले कुछ 8-10 महीनो से तो जैसे ATM मशीनों को किसी की नजर लग गई हो ऐसा प्रतीत होता है। एक तो नोटबंदी ऊपर से सरकार की तरह तरह की पाबंदिया, इन सब के चलते डिजिटल ट्रांजेक्शन का दौर चल पड़ा है। जिससे ATM मशीन की सुविधा पर ब्रेक लग गया है। आज हालत ऐसे बन गए है की बैंक नुकसान के डर से स्थापित ATM तक को बंद करने पर उतर आई है। आज सभी लोग डिजिटल ट्रांजेक्शन को सहजता से ले रहे हैं और सरकार ने डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए इतने रास्ते खोल दिए है जिससे लोग उस दिशा में ही सोच रहे है।
नोटबंदी का असर:
नोटबंदी से देश में बड़े नोटों के प्रचलन में कमी आई है एवं छोटे नोटों का प्रचलन शुरू हुआ है। लोगो ने नोटबंदी को गंभीरता से लेते हुए नोबंदी को समझने की पूरी कोशिश की है जिसके चलते ही डिजिटल ट्रांजेक्शन चलन में आया है। SBI की रिपोर्ट देखे तो आपको बड़े नोटों में कितनी कमी आई है और छोटे नोट कितने प्रचलन में आये है समझ आ जाएगा आपको SBI की रिपोर्ट से डिजिटल ट्रांजेक्शन का बढ़ता प्रचलन भी समझ आएगा। सरकार ने भी मार्केट में छोटे नोटों को ज्यादा उतरा है। आप गौर करेंगे तो एक बात और सामने आएगी की डेबिट कार्ड से जो पेमेंट 75 करोड़ था वो अब 66 करोड़ पर आ गया है। इसका सबसे बड़ा कारण स्मार्टफोन को माना जा रहा है, क्योकि आज घर- घर स्मार्टफोन पाया जाता है। सरकार द्वारा ऑनलाइन पेमेंट मोबाईल ऐप और बैंकों द्वारा नेट बैंकिंग और कई मोबाइल एप उपलब्ध कराई गई है जिसके चलते डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला है और ATM मशीन के इस्तेमाल में काफी कमी आई है।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद शर्मा

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