सुशासन को मजबूत करते कमलनाथ

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Kamal Nath

राज एक्‍सप्रेस, भोपाल। मुख्‍यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) अपने कार्यकाल के बेहद शुरूआती दौर से ही प्रदेश में जनसामान्‍य की समस्‍याओं के समाधान के लिए सकारात्‍मक कदम उठा रहें हैं। वे शासन- सत्‍ता को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध भी नजर आ रहे हैं और यही सहभागी लोकतंत्र का पर्याय भी हैं। अंतत: ऐसे जमीनी कदमों से ही सुशासन का मार्ग भी सुनिश्चित होगा।  

मध्‍यप्रदेश सरकार के मंत्री अब किसानों के बीच दरी पर बैठे भी नजर आ रहे हैं और वे विन्रमता से आम जनमानस से मिल भी रहें हैं। दरअसल,प्रदेश के मुखिया और मुख्‍यमंत्री कमलनाथ का लंबा राजनीतिक अनुभव व रचनात्‍मकता का लाभ आम जनमानस को कैसे मिलेगा इसका उदाहरण उनके और मंत्री के क्रियाकलाप से बहुत कम दिनों में महसूस कर लिया गया हैं। मुख्‍यमंत्री को डाकू कहने वाले एक शिक्षक को गरिमा का पालन करने की नसीहत के साथ क्षमा करने का अद्भूत उदाहरण हाल ही में देखनेको मिला। इसके पहले की सरकार के एक उच्‍च शिक्षा मंत्री ने विधायक के नाम के आगे माननीयनहीं लगाए जाने पर मंच पर ही एक प्रोफेसर को डपट लगाई थी। जाहिर हैं कमलनाथ जी जैसी विन्रमता की प्रदेशवासियों को दरकार थी। इसका नजारा हमने हाल ही में संपन्‍न हुए विधानसभा सत्र में भी देखा था, जहां कई वर्षों के बाद हजारों लोगोंकी भीड़ अपने नेता को देखने और सुनने राज्‍य के कोने- कोने से पहुंची थी।

वास्‍तव में सत्‍ता केवल, शासन और स्‍वशासन तक सीमित विचार ही नहीं हैं। इसका व्‍यापक अर्थ है और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से ही यह प्रत्‍यक्ष प्रजातंत्र का रूप ले सकता हैं। पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई जनसुनवाई की योजना बेहद लोकप्रिय रही लेकिन कथित नेताओं द्वारा उसे अधिकारियों पर दबाव बनाने का माध्‍यम बना लिया गया था। यह एक तरीका होता था, जिससे स्‍थानीय जनप्रतिनिधि मुख्‍यमंत्री के सामने किसी अधिकारी की कार्यक्षमता पर प्रश्‍नचिह्न लगाने का प्रयास कर सकते थे। कमलनाथ सरकार ने जनसुनवाई को बदस्‍तूर जारी रखने का फैसला तो लिया हैं लेकिन इस आमूलचूल बदलाव के साथ जिसके अंतर्गत अब हर जनसुनवाई में कलेक्‍टर के साथ विधायक भी बैठेंगे। इस प्रकार देंखे तो मुख्‍यमंत्री ने समान उत्‍तरदायित्‍व के सिद्धांत को लागू करने का साहस दिखया हैं। हाल ही में अपने ब्‍लाग में कमलनाथ ने राज्‍य की आर्थिक की आथिर्क बदहाली, कुपोषण, अपराध, घटते रोजगार के अवसर और कम होते औधोगिक निवेश के खिलाफ लड़ाई लड़ने का आहा्न करते हुए यह साफ किया था कि अगर हम बीते 15 वर्ष के इतिहास की गलतियोंसे सबक नही लेंगे, तो भविष्‍य भी हमें माफ नही करेगा।

उनके शब्‍दों में,’हमारी मान्‍यता है कि किए हुए काम अपना प्रचार खुद करते हैं, इसलिए हम सिर्फ कोरी घोषणाओंसे बचें और अपना सारा ध्‍यान काम पर लगाएं। मध्‍यप्रदेश के नागरिकों ने नई सरकार को बदलाव के लिए चुना हैं। यह बदलाव सुशासन के लिए हैं। बीते एक माह से कम समय में ही बदलाव की पदचाप सुनाई देने लगी हैं। हम सरकार में से ‘मैं और मेरी’ हटाकर ’हमारी सरकार’ की भावना स्‍थापित करना चाहते हैं। अब हर नागरिक गर्व से कह सकता है, ‘मैं भी सरकार हूं’। हम सही मायने में सत्‍ता की कमान प्रदेश के नागरिकों को सौंपना चाहते हैं। मुख्‍यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने प्रदेश के किसानों की कर्ज माफी, विवाह योग्‍य कन्‍याओं को सरकार 51 हजार रूपए की आर्थिक सहायता, प्रदेश में निवेश के लिए उधोगों को प्रोत्‍साहन राशि और प्रदेश में चार ‘गारमेंट पार्क’ स्‍थापित करने की भी घोषणा तो की लेकिन इसका प्रचार करने की मनोदशा बिल्‍कुल भी दिखाई नहीं पड़ी जिसका पिछले कई वर्षों से राज्‍य आदी हो गया था और करोड़ों रूपए पानी में जा रहें थें।

कमलनाथ सरकार ने कर्ज माफी समेत अन्‍य बेहद लोकलुभावन घोषणाओं को पूरा करने के बाद भी समाचार पत्रों या अन्‍य प्‍लेटफार्मों पर कोई विज्ञापन जनता तक पहुंचने का सबसे सशक्‍त जरिया माना जाने लगा था। इसके पहले शिवराज सरकार की लोक लुभावन योजनाएं बेहद चर्चित रहीं और इसके प्रचार प्रसार में भी कोई कमी नहीं रखी गई। मसलन सिहंस्‍थ के आयोजन में ही जनसंपर्क विभाग में अरबों रूपए खर्च कर दिए थे। पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा राज्‍य में नर्मदा नदी को प्रदूषण से मुक्‍त करने, हरियाली बढ़ाने के लिए 11 दिसंबर 2016 से 15 मई 2017 तक नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा की चर्चा पूरी दुनिया में हुई। इसके लिए सरकार ने जबरदस्‍त प्रचार किया। विज्ञापन टीवी चैनल, समाचार-पत्र और पत्रिकाओं से लेकर विदेशी अखबारों तक में प्रकाशित किए गए थे। इस दौरान एक विज्ञापन न्‍यूयॉर्क के इंडिया एब्रॉड में भी छापा गया। नमामि नर्मदे की वैश्विक छवि बनाने के लिए सरकारी तिजोरी से 33 करोड़ सात लाख 40 हजार 344 रूपए खर्च किए गए। यह सब उस राज्‍य की सरकार ने किया जो भारत के सबसे ज्‍यादा गरीब राज्‍यों में शुमार किया जाता हैं। मध्‍यप्रदेश की शिवराज सरकार ने नर्मदा का पानी क्षिप्रा में जोड़नेका व्‍यापक प्रचार किया गया जबकि क्षिप्रा में नर्मदा का पानी पहुंचा ही नहीं।

वित्‍त विभाग के बजट के मुताबिक, मध्‍यप्रदेश इस समय एक लाख 60 हजार 871.9 करोड़ रूपए के कर्ज डूबा हुआ हैं। मध्‍यप्रदेश की जनसख्‍ंया बढ़कर अब लगभग 8.29 करोड़ तक पहुंच गई हैं। इस प्रकार राज्‍य के हर नागरिक पर 19 हजार 406 रूपए का कर्ज हैं। इस बात को कमलनाथ जानते हैं और इसे दूर करने के लिए तत्‍पर भी दिखाई दे रहे हैं। मध्‍यप्रदेश के नए मुखिया कमलनाथ के काम करने का तरीका बेहद जमीनी और असरदार माना जाता हैं। उनका केंद्र सरकार में काम करने का लंबा अनुभव रहा है और जन उपयोगी योजनाओं का लाभ पूरे देश के साथ उनके संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में देखा भी जा सकता हैं। आदिवासी क्षेत्र माने जाने वाले छिंदवाड़ा की तर्ज पर प्रदेश के विकास की कमलनाथ की योजना के गहरे निहितार्थ हैं। पूरे छिंदवाड़ा में छोटे-मोटे उधोगो का जाल बिछा है और समूचे क्षेत्र का विकास किया गया हैं। छिंदवाड़ा में हाइवे का जाल बिछा हुआ हैं और स्किल सेंटर भी बनाए गए हैं यह भी बेहद दिलचस्‍प हैं कि इन कार्यों का उद्घाटन करने पर कभी कमलनाथ ने कभी जोर नहीं दिया। हाल ही में उन्‍होंने अपनी योजना को साफ भी कर दिया कि अधिकारी तय करें कि योजना क्‍या है, उसका समय पर अमल भी वे सुनिश्‍चित करें और उसका उद्घाटन भी वे ही करें।

मुख्‍यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ छिंदवाड़ा पहुंचे तो उन्‍होंने अपनी चिर परिचित शैली में काम करने के प्रति प्रतिबद्धता भी जताई। योजना तो हम बना लेते हैं लेकिन उसका डिलवरी सिस्‍टम क्‍या हैं। हमें डिलीवरी सिस्‍टम को मजबूत करना होगा। प्रचार पर लेकर तो वे सख्‍त हैं ही इस बारे में कमलनाथ का साफ कहना है कि काम होगा तो सभी को पता चल जाएगा। उनका कहना हैं कि मैं कोई भी काम करता हूं या निवेश लाता हूं तो सबसे पहले यह देखता हूं कि उसका परिणाम क्‍या होगा। मैंने स्किल सेंटर बनाए तो रोजगार को ध्‍यान में रख कर बनाए। आगे भी जो काम होगा, वो उसके परिणाम को ध्‍यान में रखकर ही होगा। सगसे गड़ी चुनौती है युवाओं के लिए रोजगार उपलब्‍ध कराना। हम इसी को ध्‍यान में रख कर योजनाएं बनाएंगे। हम परिणाम को ध्‍यान में रख कर काम करेंगे।

कमलनाथ के राजनीतिक अनुभव का लाभ प्रदेश को मिलता दिखाई दे रहा हैं। मुख्‍यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ ने  अध्‍यात्‍म विभाग गठित करने का निर्णय लिया था, जिसे अब मूर्त रूप दिया गया हैं। इससें धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व आनंद विभाग को मिलाया गया हैं। राज्‍य की एकता और अखंडता कायम रखने के लिए राज्‍य सरकार का यह बेहद महत्‍वपूर्ण कदम है। मुख्‍यमंत्री की संवेदनशीलता के चलते ही उज्‍जैन में शनि अमावस्‍या पर क्षिप्रा नदी में कीचड़ में श्रद्धालुओं को नहलाने के मामले में कलेक्‍टर और कमिश्‍नर को आधी रात को हटाने के आदेश दे दिए गए। यह साबित करता है कि उनकी कार्यशैली किस तरह की हैं।

डॉ. ब्रहमदीप अलूने (वरिष्‍ठ पत्रकार)

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