भारत विरोध की बातें अब बंद हो

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India Pakistan Relationship

राज एक्सप्रेस, भोपाल। आतंकवाद के मसले पर भारत (India Pakistan Relationship) की कोशिशों का साथ देने के बजाय पाकिस्तान उल्टा आरोप मढ़ने में जुटा है। पाक की तरफ से भारत विरोधी बातों को हवा देकर प्रधानमंत्री इमरान अपना दामन साफ करने में जुटे हैं। जबकि असलियत क्या है, यह पूरी दुनिया को पता है।

पाकिस्तान के सियासी गलियारों की हवा कुछ ऐसी है कि जो भी सत्ता की कुर्सी पर बैठता है, वह दोगला हो ही जाता है। यह पाकिस्तान के गठन के बाद से आज तक साफ देखा भी जा सकता है। मगर पाकिस्तान न तो अपनी करतूतों से बाज आ रहा है और न ही भारत सहित दुनियाभर की चेतावनियों को गंभीरता से ले रहा है। सत्ता में आने से पहले इमरान खान ने भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए जिस तरह से बड़ी-बड़ी बातें की थीं, उससे लगा था कि अब वह समय आ गया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच अदावत के दिन लद गए, मगर समय बीतते-बीतते उनका रंग भी सामने आ गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कहते हैं कि आम चुनावों की वजह से भारत लोगों को पाकिस्तान के खिलाफ भड़का रहा है। फिर वह कहते हैं कि परमाणु संपन्न दो देशों के बीच युद्ध समाधान नहीं हो सकता। इतने पर भी जब भारत का धैर्य नहीं टूटा तो कहने लगे कि भारत शांति प्रस्ताव पर जवाब ही नहीं दे रहा है। इन बयानों के क्या मायने निकाले जाएं। लेकिन भारत ने पाक को जवाब देने के बजाय उसे ही आईना दिखाते हुए कहा है कि पाक मुख्यधारा के आतंकवाद को शह दे रहा है। आतंकवाद पर पाक का नजरिया साफ नहीं है।

इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान को पांच सबूत भी दिए है कि वह किस तरह से आतंकवाद और आतंकियों को बढ़ावा दे रहा है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शहरयार अफरीदी का 16-17 दिसंबर-2018 को ने आतंकवादी हाफिज सईद के प्रतिनिधि से मिलना, पीओके में जमात उद दावा के दफ्तर का इमरान की पार्टी के नेता द्वारा उद्घाटन किया जाना पाक की नीयत को साबित करता है। इतना ही नहीं आतंकी सैय्यद सलाहुद्दीन को अक्टूबर 2018 में जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों के लिए पाकिस्तानी सेना ने सैन्य समर्थन दिया था। 30 सितंबर-2018 को पाकिस्तान के धार्मिक मंत्री नूर-उल-हक कादरी हाफिज सईद के साथ सार्वजनिक मंच पर नजर आए थे। जहां दोनों ने भारत विरोधी बयान दिए थे। यह सब देखते और जानते हुए भी अगर इमरान भारत को दोस्ती की राह में रोड़ा बता रहे हैं, तो इससे उनकी समझ पर सवाल खड़ा होता है। भारत ने पाकिस्तान के साथ दोस्ती की गाड़ी पटरी पर लाने के लिए क्या क्या किया है, यह पूरी दुनिया को पता है।

ऐसा कोई मौका नहीं है, जब भारत ने शांति के लिए अपनी तरफ से पहल नहीं की, लेकिन हर बार उसे आतंकी हमले का तोहफा मिला। एक भी बार पाक ने गंभीरता दिखाते हुए भारत की बात नहीं सुनी। इस बार उम्मीद थी कि इमरान बदलाव लाएंगे, पर वे भी सत्ता और सेना के बनाए रास्ते पर चल निकले हैं। भारत पर तोहमत मढ़ने से पहले उन्होंने यह देखना जरूरी नहीं समझा कि सीमा पर फायरिंग किस तरह से हो रही है। आतंकी किसकी सीमा पर बैठकर साजिश कर रहे हैं। इमरान को यह सब तब दिखेगा, जब वे अपने उस भारत विरोधी चश्मे को निकाल फेकेंगे, जो सेना ने उन्हें पहना रखा है।

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