आईएस सरगना की पंजाब में दस्तक

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Zakir Musa

राजएक्सप्रेस,भोपाल। आईएसआईएस की भारत की शाखा ‘अंसार गजवात-उल-हिंद’ का मुखिया और आतंकी संगठन हिजबुल का कमांडर जाकिर मूसा इन दिनों पंजाब में देखा गया है। पंजाब पुलिस ने जाकिर मूसा (Zakir Musa) के पंजाब में घुस जाने का जो अंदेशा जताया है, वह देश सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। दरअसल, जाकिर भारत में बड़े हमले करने की फिराक में है और उसके इस इरादे में पाकिस्तान पूरा सहयोग कर रहा है।

डिजिटल युग के नए दहशतगर्दो पर अब तक नकेल कसने में कामयाब भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस समय बेहद आशंकित हैं। दरअसल, पंजाब पुलिस ने (Zakir Musa) जाकिर मूसा के पंजाब में घुस जाने का जो अंदेशा जताया है, वह देश सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। जाकिर मूसा इस समय आईएसआईएस की भारत की शाखा ‘अंसार गजवात-उल-हिंद’ का मुखिया है और उसके इरादे भी बेहद खतरनाक हैं। वह कश्मीर के अन्य आतंकी संगठनों से अलग और क्रूर पहचान बनाने को भी आमादा है। पंजाब के अमृतसर में पुलिस ने आतंकी जाकिर मूसा के पोस्टर शहरभर में कई जगहों पर लगाए हैं। इन पोस्टर में बड़े-बड़े अक्षरों में वांटेड जाकिर मूसा लिखा हुआ है। इसके पहले इस महीने की शुरुआत में आई इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने कश्मीर घाटी में आतंकी जाकिर मूसा और हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ मिलकर हमला करने की योजना से संबंधित इनपुट दिया था।

चंडीगढ़ के एक इंजीनियरिंग कालेज में साल 2013 तक पढ़ने वाला जाकिर रशीद भट अचानक गायब हो गया और बाद में हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर जाकिर मूसा के रूप में सामने आया। मूसा डिजिटल युग में इस्लामिक स्टेट के भ्रामक प्रचार की गिरफ्त में आया और फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप तथा टेलीग्राम जैसी सोशल साइटों से जुड़कर आतंकी बन गया। पिछले साल मूसा की आतंक की सबसे बड़ी संस्था आईएसआईएस से जुड़ने की पुष्टि हुई। जब 26 जुलाई 2017 को अलकायदा समर्थक मीडिया प्रतिष्ठान ग्लोबल इस्लामिक मीडिया फ्रंट ने मैसेजिंग एप टेलीग्राम पर एक स्टेटमेंट जारी किया था जिसमें कश्मीर में एक नए जिहादी गुट अंसार गजवात-उल-हिंद के गठन की घोषणा की गई थी। इसकी कमान जाकिर मूसा के संभालने की घोषणा भी इसमें शामिल थी।

इस्लामिक स्टेट ने सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर के युवाओं को कट्टरपंथ से जोड़ा है और मूसा इसी का फायदा उठाकर अब भारत में हमले करना चाहता है। साल 2016 में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में अस्थिरता बढ़ी है और इस्लामिक स्टेट को यह स्थिति मजबूत होने के लिए मुफीद नजर आती है। इसी सिलसिले में आईएस ने इलाके के युवाओं से संगठन से जुड़ने की अपील की है। यही नहीं पिछले दिनों आईएस की मैगजीन रुमैया के उर्दू संस्करण के एक अंक में कश्मीर के लोगों के लिए ‘खलीफा की जमीन से संदेश’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ था जिसमें कश्मीर को इस्लामिक राज्य बनाने की घोषणा की गई थी। यह मैगजीन मैसेजिंग एप टेलीग्राम पर जारी की गई थी। इस्लामिक स्टेट ने टेलीग्राम पर उसका समर्थन करने वाले एक चैनल ने एक बयान प्रसारित किया था जिसमें कश्मीर में मौजूद इस्लामिक स्टेट के सभी समर्थकों से एक बैनर के तले आने की अपील भी की गई थी। मूसा सोशल मीडिया से दहशतगर्द तैयार करने में माहिर माना जाता है और इसका प्रमुख सहयोगी बुरहान वानी सोशल मीडिया को हथियार बनाकर कश्मीर में पोस्टर ब्वॉय बन गया था। बुरहान वानी के साल 2016 में कश्मीर में सेना के हाथों मारे जाने के बाद पृथकतावादी ताकतें मजबूत हुई हैं। इसका फायदा मूसा को मिला है और घाटी में कई विरोध प्रदर्शनों में आईएसआईएस के झंडे फहराने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

मूसा भारत में इस्लामिक स्टेट की तर्ज पर काम करना चाहता है और वह इसका इजहार भी कर चुका है। इस्लामिक स्टेट की कमान संभालने के बाद जाकिर मूसा ने कश्मीर को इस्लामिक राज्य बनाने की बात भी कही थी। मूसा की तरफ से घाटी के अलगाववादी नेताओं को चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने कश्मीर को धार्मिक की जगह सियासी मुद्दा बताया तो उनका सिर कलम कर दिया जाएगा। इस बीच मूसा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां खास तौर पर चौकन्नी हैं। पंजाब से मूसा परिचित है और राज्य के खालिस्तानी समर्थकों से उसके जुड़ने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। पिछले दिनों जालंधर में कुछ कश्मीरी आतंकियों के मददगार विद्यार्थियों को पकड़ा गया था, जिसमें एक मूसा का रिश्तेदार भी बताया गया था। जालंधर के एक हॉस्टल से इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले तीन छात्रों और उनके साथ एक मास्टरमाइंड को भी पुलिस ने पकड़ा जिसमें दो बीटेक कर रहे थे, जबकि तीसरा मेडिकल लैब साइंस का विद्यार्थी था। देखने में आया यह है कि इस समय भारतीय खुफिया एजेंसियां पाक प्रायोजित आतंकवाद की एक नई और गंभीर चुनौती का सामना कर रही है जिसके अंतर्गत नामी शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले कुछ उच्च शिक्षित युवा आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए तैयार हो रहे हैं। इसमें अधिकांश वे कश्मीरी छात्र हैं जो देश के कई इलाकों में रहकर अध्ययन कर रहे है। मूसा के रिश्तेदार समेत जिन छात्रों को जालंधर से पकड़ा गया था उनसे खतरनाक हथियार व विस्फोटक बरामद किए गए थे। ये विद्यार्थी होस्टल कैंपस में रहकर पढ़ाई करते थे और बेहद शातिराना तरीके से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। पुलिस और खुफिया एजेंसियों से बचने के लिए इनके द्वारा टेलीग्राम मैसेंजर का सहारा लिया गया था। फोन पर बात किए बिना ये छात्र टेलीग्राम मैसेंजर से चैट करते और मैसेज को तुरंत डिलीट कर देते।

जाकिर मूसा के देश के कई इलाकों में रहने वाले कश्मीरी छात्रों से संबंध होने और स्लीपर सेल के मजबूत होने की आशंका भी गहरा गई है। कश्मीर घाटी में आईएसआईएस की मौजूदगी के बाद देश के अन्य इलाकों में रहने वाले कश्मीरी छात्रों से उसकी संपर्क की कोशिशें भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी चिंता का कारण है। इन घटनाओं बीच इस आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए आईएस से हाथ मिला लिया है। अंसार गजवत-उल-हिंद, अलकायदा के स्लीपर सेल के तौर पर काम करता है और उसे मजबूत करने के लिए आईएसआई भारत के अन्य इलाकों में फैले अपने नेटवर्क के सहारे उसका सहयोग कर रही है। यही नहीं आईएसआई भारत के अन्य इलाकों में पढ़ने वाले छात्रों को भी आतंकवाद में धकेल देना चाहती है, जिससे कश्मीर में अस्थिरता बनी रहे। अब देश के दूरदराज के इलाकों में पढ़ने वाले कश्मीरी युवाओं के आतंक से जुड़ने की घटनाएं बेहद साजिश पूर्वक अंजाम दी जा रही हैं। शिक्षित युवाओं का उपयोग डिजिटल युग में खौफनाक आतंकी हमलों के लिए किया जा सकता है, ऐसी आशंका भी बढ़ने लगी है।

पंजाब को लेकर मूसा की बड़ी योजना हो सकती है और उसकी मददगार पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई हो सकती है। पाक खालिस्तान को जिंदा रखने के लिए अपनी जमीन का बेजा इस्तेमाल करने से कभी परहेज नहीं करता। लाहौर में सिख अतिवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सरगना वधवा सिंह बब्बर लंबे समय तक पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती में रहा। इस दौरान उसने लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर सिख आतंकवाद को फिर से जिंदा करने की कोशिशें की। आईएसआई खालिस्तान के नाम पर सिख युवाओं को भड़काकर स्लीपर सेल बनाने को आमादा है। बहरहाल आईएसआईएस का जाकिर मूसा का तुरंत पकड़ा जाना बेहद जरूरी हो गया है। जाकिर मूसा की तकनीकी दक्षता और स्लीपर सेल से उसकी संबद्धता आतंक का खौफनाक मंजर फैला सकती है।
डॉ. ब्रहमदीप अलूने (वरिष्ठ पत्रकार)

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