सिंगापुर: PM मोदी का आसियान के साथ व्यापार पर जोर

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ASEAN-India Breakfast Summit in Singapore

सिंगापुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को भारत-प्रशांत क्षेत्र के विकास और समृद्धि के लिए व्यापार और समुद्री सहयोग की महत्ता पर जोर दिया। सिंगापुर में श्री मोदी ने भारत-आसियान ब्रेकफास्ट सम्मेलन (ASEAN-India Breakfast Summit in Singapore) में दक्षिणपूर्वी एशियाई नेताओं के साथ मुलाकात की और कहा कि, 10 आसियान देशों के साथ भारत की साझेदारी विश्व शांति और समृद्धि में योगदान दे रही है। प्रधानमंत्री ने बैठक के बाद ट्वीट किया कि, ‘एक शानदार भविष्य के लिए पुराने बंधनों को फिर से जोड़ना होगा। आसियान-भारत अनौपचारिक ब्रेकफास्ट शिखर सम्मेलन में आसियान नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बातचीत हुई। हमें खुशी है कि, आसियान के साथ हमारे संबंध मजबूत हैं जो, एक शांतिपूर्ण और समृद्ध दुनिया बनाने में योगदान दे रहे हैं।’

भारत 1996 में आसियान का पूर्ण सदस्य बन गया था:

श्री मोदी ने कहा कि, भारत 1996 में आसियान का पूर्ण सदस्य बन गया था और वस्तुओं, सेवाओं और निवेश के समझौतों पर भी हस्ताक्षर किये हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत और आसियान के बीच सक्रिय और क्रिया-उन्मुख साझेदारी ने कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, आधारभूत संरचना, कनेक्टिविटी, संस्कृति और मानव संसाधन विकास के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया है।

उन्होंने कहा कि, आसियान भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 81 अरब 33 करोड़ डॉलर का है। औपचारिक ब्रेकफास्ट बैठक में सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसेन लूंग ने कहा, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) को बढ़ाने देने के लिए भारत को आसियान में शामिल होना चाहिए, जिसके लिए दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने के लिए बातचीत चल रही है।

आसियान-भारत के बीच संबंधों की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर मोदी नई दिल्ली में एक संस्मारक शिखर सम्मेलन में आसियान नेताओं से मुलाकात की थी। वे इस वर्ष भारत के गणतंत्र दिवस परेड के दौरान विशेष मेहमान थे। भारत उभरते क्षेत्रीय आर्थिक और सुरक्षा संरचना में आसियान की महत्ता को भी मान्यता देता है। प्रधानमंत्री ने इस दौरान 13वें पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन में भाग लिया। शिखर सम्मेलन में भारत ने छ: प्राथमिक क्षेत्रों पर्यावरण और ऊर्जा, शिक्षा, वित्त, वैश्विक स्वास्थ्य और महामारी रोग, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन और कनेक्टिविटी के लिए सहयोग का समर्थन किया।

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