गुरु और शनि के दुर्लभ योग में मनेगी दीपावली 2018

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Deepawali 2018

राज एक्सप्रेस/श्योपुर। दीपों का पर्व दीपावली कल बुधवार, 7 नवंबर 2018 (Deepawali 2018) को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक मास की अमावस्या है। दिवाली पर धन की देवी महालक्ष्मी की विशेष पूजा करने से, घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। पं.मनीष दुबे के अनुसार, इस साल दीपावली पर 59 साल बाद गुरु, शनि का दुर्लभ योग बन रहा है।

Deepawali 2018 पर बन रहे खास योगों से जुड़ी बातें:

दिवाली पर गुरु ग्रह मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में रहेगा। मंगल ग्रह शनि के स्वामित्व वाली कुंभ राशि में रहेगा। शनि ग्रह गुरु के स्वामित्व वाली राशि धनु में रहेगा। ये तीनों ग्रह एक-दूसरे की राशि में रहेंगे। शुक्र अपनी खुद की तुला राशि में रहेगा। शुक्र के इस राशि में होने से मालव्य योग बन रहा है। इस योग में शुरू किए गए कामों से धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस वजह से दीपावली (Deepawali 2018) पर की गई पूजा बहुत जल्दी शुभ फल प्रदान कर सकती है। इस साल से पहले 1 नवंबर 1959 को दीपावली पर गुरु वृश्चिक में शनि धनु राशि में था।

जब बुधवार को दीपावली (Deepawali 2018) आती है तो, ये बहुत ज्यादा शुभ फल प्रदान करने वाली मानी जाती है। ये योग व्यापार शुरू करने के लिए बहुत शुभ रहता है। व्यापार में लगातार उन्नति के योग बनते हैं। शुक्र के मालव्य योग में शुरू किए गए काम ऐश्वर्य, धन और सुख प्रदान करते हैं। ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े लोगों के लिए ये योग फायदेमंद रहने वाला है। शुक्र के कारण इस क्षेत्र से जुड़े लोग विशेष सफलता हासिल करेंगे। गुरु ग्रह मंगल की राशि में होने से जमीन से जुड़े काम करने वाले लोग लाभ में रहेंगे।

रुपया मजबूत हो सकता है:

शनि गुरु की राशि में होने से डॉलर के भाव कमी आने संभावना है। रुपया मजबूत हो सकता है। तेल के भाव भी कम हो सकते हैं। दीपावली पर सुबह महाकाली की पूजा करनी चाहिए। दोपहर में पितरों का पूजन और श्राद्ध आदि कर्म करना चाहिए। दीपावली की शाम गणेश जी, महालक्ष्मी और कुबेरदेव की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद हनुमानजी की पूजा करें। दिवाली पर क्रोध न करें। घर में क्लेश नहीं करना चाहिए।

मान्यता है कि, जिन घरों में शांति रहती है, वहां देवी लक्ष्मी का वास होता है। दिवाली पर नशा नहीं करना चाहिए। काफी लोग इस दिन जुआं खेलते हैं, इससे भी बचना चाहिए। ध्यान रखें जो, लोग अपने माता-पिता और बड़ों का अपमान करते हैं, सम्मान नहीं करते, उन्हें देवी लक्ष्मी की कृपा नहीं मिल पाती है। दीपावली से पहले पूरे घर की साफ-सफाई अवश्य करें। कहीं भी गंदगी नहीं होनी चाहिए। इससे स्वास्थ्य लाभ के साथ ही धार्मिक लाभ मिलते हैं।

9 दीप से सभी ग्रहों की होती है शांति:

शहरों में भले ही परंपराएं टूट रही हों, लेकिन गांवों में आज भी इन्हें बदस्तूर निभाया जा रहा है। दीपावली पर्व से कई परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में से एक है, ग्वालिन पूजन। गांवों में इनके बिना लक्ष्मीजी का पूजन नहीं किया जाता है। शहरों में भी लोग दीपावली के लिए ग्वालिन का पूजन अवश्य करते हैं। 9 दीपों को धारण करने वाली ग्वालिन धन-धान्य एवं समृद्धि की प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि, यह घरों में क्लेश और विघ्न-बाधाओं,दोष को दूर कर खुशहाली लाती हैं। इसीलिए, लोग इनका पूजन अवश्य करते हैं। हालांकि, समय के साथ बदलते बाजार में अब 5 से लेकर 7,9,11 दीपों वाली ग्वालिन भी आने लगी हैं।

ग्वालिन जिन्हें दरिद्र लक्ष्मी भी कहा जाता है:

ग्वालिन का पूजन लक्ष्मी और गणोशजी के साथ बराबर से किया जाता है। दरिद्र लक्ष्मी को भी ग्वालिन कहा जाता है। ये 9 दीपों के साथ आती है। जिसकी मान्यता व्यक्ति को 9 ग्रहों से शांति दिलाना होता है। प्रत्येक दीप एक ग्रह का सूचक होता है। इन सभी दीपों में लाई, बताशा, सिंघाड़ा, रखकर पूजन किया जाता है। पूजन के बाद इन्हें घर पर ही रख लिया जाता है।

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