शास्त्रीय संगीतकार अन्नपूर्णा देवी 91 वर्ष की उम्र में निधन

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Annapurna Devi

प्रसिद्ध हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार अन्नपूर्णा देवी (Annapurna Devi) का शनिवार की सुबह मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। वह 91 वर्ष की थीं। वह पिछले कुछ वर्षों से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें तड़के तीन बजकर 51 मिनट पर मृत घोषित किया गया।

मुस्लिम परिवार में हुआ था जन्म:

बता दें कि, अन्नपूर्णा देवी का जन्म नाम रोशनआरा खां था। वह मैहर घराने के उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खान की बेटी थीं। अलाउद्दीन खां महाराजा बृजनाथ सिंह के दरबारी संगीतकार थे। बेटी के जन्म के बाद जब उन्होंने दरबार में इसकी जानकारी दी तो महाराज ने नवजात बच्ची का नाम अन्नपूर्णा रख दिया था, जिसके बाद से उन्हें अन्नपूर्णा देवी के नाम से जाने जाना लगा।

करियर:

अन्नपूर्णा देवी अपने पिता से संगीत की शिक्षा लेने के कुछ वर्षों बाद ही मैहर घराने (स्कूल) की सुरबहार (बांस का सितार) वादन की एक बहुत ही प्रभावशाली संगीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहीं। उन्होंने अपने पिता के बहुत से संगीत शिष्यों को मार्गदर्शन देना प्रारम्भ कर दिया था, इनमें प्रमुख हैं- हरिप्रसाद चौरसिया, निखिल बनर्जी, अमित भट्टाचार्य, प्रदीप बारोट और सस्वत्ति साहा (सितार वादक) और बहादुर खान। इन सभी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के वाद्ययंत्रों के गूढ़ रहस्यों का ज्ञान अन्नपूर्णा देवी से ही प्राप्त किया है।

हिंदू धर्म किया स्वीकार :

अन्नपूर्णा देवी को शास्त्रीय संगीत और सुरबहार की शिक्षा अपने पिता उस्ताद अलाउद्दीन खां से मिली। पंडित रविशंकर भी खां साहब के शिष्य थे। पंडित रविशंकर से विवाह से पहले अन्नपूर्णा देवी ने 1941 में हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया। 21 साल बाद दोनों का तलाक हो गया। पंडित रविशंकर से शादी टूटने के बाद अन्नपूर्णा देवी मुंबई चली गईं। 1982 में उन्होंने अपने शिष्य रूशिकुमार पंड्या से शादी कर ली। 2013 में पंड्या का निधन हो गया।

ममता बनर्जी ने जताया शोक:

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर शोक जताया है। ममता ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, ‘अन्नपूर्णा देवी के निधन से दुखी हूं…उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।’

अन्नपूर्णा देवी के जीवन से जुड़ी रोचक बातें:
  • अन्नपूर्णा देवी को शास्त्रीय संगीत के लिए 1977 में पद्मभूषण मिला था।
  • देश के जाने-माने सितार वादक पंडित रविशंकर की पूर्व पत्नी अन्नपूर्णा देवी थीं।
  • 1941 में पंडित रविशंकर से इनकी  शादी हुई।
  • 21 साल बाद तलाक हो गया।
  • पंडित रविशंकर का निधन दिसंबर 2012 में हुआ।
  • वर्ष 2004 में भारत सरकार द्वारा स्थापित ‘संगीत नाटक अकादमी’ ने इन्हें अपना (ज्वेल फेलो) घोषित किया।
  • वर्ष 1999 में इन्हें रबिन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित ‘विश्व-भारती विश्वविद्यालय’ ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से विभूषित किया।
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