आत्मघाती प्रवृत्ति की तरफ युवा

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Suicidal Tendency Increasing Among Youth

राजएक्सप्रेस,भोपाल। लक्ष्य निर्धारण के बिना आगे बढ़ने की चाह युवाओं को असफलता की ओर ले जा रही है और वे आत्महत्या (Suicidal Tendency Increasing Among Youth) जैसा घातक कदम उठा रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि कोई भी काम लक्ष्य निर्धारण के बिना नहीं किया जा सकता है। यह बात युवा जब तक नहीं समझेंगे, अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाएंगे। युवाओं को यह समझना ही होगा।

वर्तमान जमाने में व्यस्तता से भरी जिंदगी में हर मनुष्य की अपनी समस्याएं हैं, चाहे वे बच्चे हों या घर के बड़े। रोज सुबह हम सब लोग काम पर जाते हैं एवं दिन भर काम करने के बाद घर लौटते हैं। अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताते हैं और फिर से दूसरे दिन की तैयारियों में लग जाते हैं। रोज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में दो पल थम कर और शांत चित्त मन से क्या हमने कभी सोचा है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। हमारे जीवन का लक्ष्य क्या हैं और हम किस उद्देश्य से परिश्रम कर रहे हैं। इस आधुनिक युग में कोई भी व्यक्ति जीवन में हार का सामना नहीं करना चाहता, क्योंकि असफलता एक ऐसा भयानक डर है, जो किसी भी व्यक्ति की नींद उड़ा सकता हैं। परंतु कटु सत्य तो यह है कि हमारे चाहने या न चाहने से हमें सफलता प्राप्त नहीं होती। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और लगन की बहुत आवश्यकता है।

सफलता को प्राप्त करने का कोई निश्चित पैमाना नहीं हैं। कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो अपने जीवन में निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते क्योंकि उनमें कुछ कमियां रह जाती हैं। ऐसे व्यक्ति जीवनपर्यन्त दुखी रहते हैं इसलिए कि महत्वपूर्ण समय उनके जीवन से जा चुका होता है। अत: वे चाहकर भी अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाते। जीवन जीने के दो रास्ते होते हैं प्रथम तो जो हो रहा है उसे होने दें और हम भी उसी प्रवाह में बह चलें। दूसरा रास्ता यह है कि हम उस प्रवाह को हिम्मत कर बदलें एवं अपना लक्ष्य निर्धारित कर अपनी राह स्वयं बनाएं। लक्ष्य निर्धारण के बाद हमें सर्वप्रथम कठिन प्रयास कर स्वयं के लिए योजना बनाना व लगातार प्रयास करने की आवश्यकता होती है। जीवन में लक्ष्य का होना बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब हमें हमारे लक्ष्य का पता होता होगा तब हमारी मेहनत भी सही दिशा में होगी। लक्ष्य हमारा प्रत्येक कदम मजबूत बनाता है, ताकि हम अपनी राह पर चलते समय थके नहीं। जीवन में किसी लक्ष्य को निर्धारित किए बिना आगे बढ़ना पूर्णत: व्यर्थ है।

लक्ष्य निर्धारित कर उसके लिए कड़ी तपस्या अर्थात मेहनत करने से भविष्य में न सिर्फ हम सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि हमें स्वयं पर गर्व भी होगा कि हमने अपना मनवांछित लक्ष्य प्राप्त किया है। इस युग में हम महसूस करते हैं कि हमारे बच्चे और युवा वर्ग बहुत ही आसानी से निराश हो जाते हैं। वे उन्हें यह आभास कराना आवश्यक है कि सफलता की सीढ़ी चढ़ना हो तो कभी कभी असफलता को भी गले लगाना जरूरी है। इससे हम काफी कुछ सीखते हैं। यदि लक्ष्य सटीक है तो हम असफलता को भूलकर भी आगे बढ़ सकते हैं। ईश्वर प्रयास करने वालों का साथ देते हैं। कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। सफल होना हर प्राणी का लक्ष्य होता है। हर इंसान दूसरे से अधिक सफल होने के सपने लेता है। सफलता प्राप्त करना कठिन कार्य तो है ही परंतु अपने काम के तरीकों में और सोचने की क्रिया में कुछ बदलाव लाकर कोई भी व्यक्ति सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकता है। सकारात्मक सोच सफलता प्राप्त करने की एक बड़ी सीढ़ी है। अपने आत्मविश्वास को डगमगाने न दें। यदि कभी डगमगाएं भी तो ऐसे में सोच को कभी नकारात्मक न बनाएं, सोच सकारात्मक ही रखें।

मौन सबसे बड़ी तपस्या है। इसे जीवन में ढालने का प्रयास करें। जब भी बोलें, नाप तोल कर ही बोलें। अपनी ऊर्जा फालतू की बातों में न गंवाएं। अधिक बोलने से दूसरों की खूबियों को आप पहचान नहीं पाएंगे और बहुत-सी काम आने वाली बातें भी नजरअंदाज हो जाएंगी। समय व्यर्थ कभी न गंवाएं। समय को समझने वाले हमेशा सफल होते हैं। अपने लिए समयसारिणी बनाएं और प्रयास करें कि आप उसी के अनुसार चलें। ऐसा न करें कि जिस काम में लग गए, बस उसे ही पूरा करने के चक्कर में अपने जरूरी काम भी भूल जाएं। रात को सोने से पहले दिन भर किए कामों पर विचार करें और महसूस करें कि आज का दिन आपका कैसा रहा। डायरी लिखने पर भी आप अपनी कमियों को सुधार सकते हैं। डायरी लिखते समय मन स्पष्ट रखें। किसी भी काम को शीघ्र निपटाने का प्रयास न करें। सोच समझ कर काम करें। ऐसा अपने पर चरितार्थ न होने दें कि जल्दी का काम शैतान का है। जल्दबाजी में कई फैसले गलत हो जाते हैं। काम करते हुए सहनशीलता को न भूलें। टाइम पास करने के लिए ही काम न करें।

अपने कैरियर को ऊंचा उठाने के लिए व्यर्थ के कामों से बचें। कोई भी काम करें तो पूरी लगन, मेहनत और योजनाबद्ध तरीके से करें। सच्ची लगन सफलता को पास बुलाती है। काम स्वयं निपटाने का प्रयास करें। दूसरों पर आश्रित होने से आप स्वयं को पंगु बनाते हैं। सफलता आलस्य के पास फटकती भी नहीं, वह कोसों दूर भागती है। स्वयं काम करने से आपकी शारीरिक व मानसिक शक्ति का विकास होता है। ऐसे में आप उन मुश्किलों को आगे के लिए दूर करते हैं-जिनका सामना आपको करना पड़ा। ऐसे अनुभवों से आगे बढ़ने का मजा कुछ और होता है। अपने अंदर से हीन भावना को निकालकर अपने अंदर आत्मबल बढ़ाएं। कभी भी यह सोचकर हिम्मत न हारें कि यह असंभव है। सच्ची लगन और आत्मबल से आप संभव बना कर दिखाएं। अपने मिजाज को खुश बनाए रखें। तनाव पैदा न करें, न तनाव में जीयें। स्वयं खुश रहें और औरों को भी प्रसन्न रखें। नींद पूरी लें। अपनी शारीरिक जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखें। परिवार के लिए समय निकालें। अपनी जिंदगी से चिड़चिड़ापन निकाल खुशहाल वातावरण बनाएं। देखिए सफलता आपके साथ होगी।

आत्मविश्वास वह शक्ति है, जिससे सफलता की ऐसी गाथा लिखी जा सकती है, जो अब तक नहीं लिखी गई। आज के प्रतिस्पर्धा के दौर में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हमारे अंदर आत्मविश्वास का होना अतिआवश्यक है। आत्मविश्वास की कमी के कारण जीवन में मिलने वाले कई महत्वपूर्ण अवसर हमारे हाथ से निकल जाते हैं। आज एक शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति भी स्वयं पर शक करके, आत्मविश्वास की कमी के कारण सफलता के रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करवाने से चूक जाता है। आज इसी आत्मसंशय की वजह से बहुत से लोगों की जुबान पर एक बात सुनने में आती है कि हमसे यह नहीं होगा, हम यह नहीं कर पाएंगे। ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को अलग अलग व्यक्तित्व तथा वरदान प्रदान किए हैं। सिर्फ हमें इन्हें पहचानने की आवश्यकता हैं। इंसान की सोच एक ऐसी चीज है जो उसे डुबा भी सकती है और उसकी नाव को पार भी लगा सकती है। योग्यता व आत्मविश्वास रेल के दो पहियों के समान हैं। जैसे इनके बगैर गाड़ी पटरी पर नहीं दौड़ सकती उसी प्रकार जीवन में सफलता के आयाम को पाने के लिए योग्यता एवं आत्मविश्वास का होना अतिआवश्यक है।

आत्मविश्वास हमारी जीवन शैली का एक हिस्सा है जो एकदम से विकसित नहीं हो पाता। यह एक आदत है और एसी आदत को बनाए रखने के लिऐ मनुष्य को नीचे से उपर की ओर काम करना होगा। अर्थात छोटे छोटे कदमों से मंजिल पार करके फल हासिल करना होगा। इसके लिए हमें स्वस्थ जीवन शैली को जीवन में अपनाना होगा। हमें आत्मविश्वास एवं अतिआत्मविश्वास दोनों के बीच का अंतर समझना जरूरी है। आत्मविश्वास ईश्वर के दिए हुए उपहार स्वरूप है एवं अतिआत्मविश्वास श्राप की तरह साबित हो सकता है। आत्मविश्वास की कमी का कारण हमारे अंदर का एक अंजान सा डर हैं। धीरे-धीरे यह डर आत्मविश्वास की जड़ों को दीमक की तरह खोखला कर देता है। यही प्रवृत्ति आज देश के अधिकांश युवाओं की हो चुकी है। वे लक्ष्य निर्धारण के बिना आगे बढ़ना चाह रहे हैं और सफल न होने पर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। यह प्रवृत्ति कम होने का नाम नहीं ले रही है।
आर्चबिशप डॉ. लियो कार्नेलियो (आर्च डायसिस ऑफ भोपाल)

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