केंद्र कैबिनेट द्वारा तीन तलाक पर अध्यादेश पारित

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केंद्र कैबिनेट द्वारा तीन तलाक पर अध्यादेश पारित : Union Cabinet approves ordinance on Triple Talaq

नई दिल्ली। केंद्र कैबिनेट ने तीन तलाक (Triple Talaq) पर अध्यादेश पारित कर मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में फैसला लिया है। कई महीनों से यह अध्यादेश रुका हुआ था, पिछले दो सत्रों से राज्यसभा में पास नहीं हो पाया था। यह अध्यादेश 6 महीने तक लागू रहेगा, जिसके बाद सरकार को दोबारा इसे बिल के तौर पर पास करवाने के लिए संसद में पेश करना होगा। इस पर राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे अवैध बता चुका है। संविधान के अनुच्छेद 123 के मुताबिक, जब संसद सत्र नहीं चल रहा हो तो राष्ट्रपति केंद्र के आग्रह पर कोई अध्यादेश जारी कर सकते हैं। यह अध्यादेश अगला सत्र समाप्त होने के बाद छह हफ्ते तक जारी रह सकता है।

उत्तर प्रदेश में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने खुशी जाहिर की

उन्होंंनें कहा कि कट्टरपंथी समाज के खिलाफ हिंदू और मुस्लिम समाज समेत सभी लोग पीड़ित महिलाओं के साथ हैं। महिलाओं की जीत हुई है। महिलाओं ने कट्टरपंथी तबके से टकराते हुए मामले को समाज में लाने का काम किया और सुप्रीम कोर्ट तक गईं। रिजवी ने कहा कि अब हम परिवार में लड़कियों की हिस्सेदारी के लिए भी आगे लड़ाई लड़ेंगे।

 PM मोदी ने किया समर्थन

पीएम मोदी ने 15 अगस्‍त को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में कहा था कि तीन तलाक प्रथा मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय है। तीन तलाक (Triple Talaq) ने बहुत सी महिलाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है और बहुत सी महिलाएं अभी भी डर में जी रही हैं।

अखिर क्या क्या संशोधन किये

मजिस्ट्रेट को ज़मानत देने का अधिकार होगा। मजिस्ट्रेट के सामने पति-पत्नी में समझौते का विकल्प भी खुला रहेगा। मजिस्ट्रेट इसे उचित शर्तों के साथ मंजूरी दे सकते हैं। शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पीड़ित महिला को स्वयं इसके बारे में शिकायत करानी होगी, पड़ोसी या कोई दुसरा व्यक्ति इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है। लेकिन परिजन औऱ खुन के रिश्ते वाले लोग जरुर केस दर्ज करवा सकते हैं।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वोट बैंक के दबाव में कांग्रेस ने तीन तलाक बिल को समर्थन नहीं दिया। अगर कांग्रेस पार्टी को इंसाफ और इंसानियत में भी राजनीति दिखाई देती है तो उसे समझाने का काम हमारा नहीं है। सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और मायावती को इस मुद्दे पर सरकार का साथ देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष मुल्क में बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ नाइंसाफी हो रही थी। तीन तलाक (Triple Talaq) का यह मुद्दा नारी न्याय और नारी गरिमा का मुद्दा है, अपराध संज्ञेय तभी होगा, जब खुद पीड़ित महिला या उसके परिजन शिकायत करेंगे।

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