सेना में कटौती का कोई प्रस्ताव नहीं: रक्षामंत्री सीतारमण

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Nirmala Sitharaman
सेना को और ताकतवर बनाने पर जोर

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने मंगलवार को कहा कि सरकार का सेना में जवानों की संख्या कम करने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। श्रीमती सीतारमण ने मंगलवार को महिला प्रेस क्लब में संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि अभी उनके पास सेना में कटौती का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने कहा ,सेना प्रमुख ने अपने कमांडरों के साथ सेना के पुनर्गठन पर बात की होगी, लेकिन अभी उनके सामने कुछ नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यह शेकतकर समिति की रिपोर्ट के आधार पर किया गया होगा जिसमें सेना को और ताकतवर बनाने पर जोर दिया गया है। शायद सेना प्रमुख ने इसी आधार पर बात की हो।

रूस से अत्याधुनिक मिसाइल सुरक्षा प्रणाली एस-400 के बारे में उन्होंने कहा कि यह सौदा एकदम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लेकिन यह देखना होगा कि क्या रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्र से पहले इस पर हस्ताक्षर होंगे, लेकिन इसको लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है।सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सेना में कई और शाखाओं में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिया जायेगा। बैंकों से करोड़ों रुपए का कर्ज लेकर लंदन फरार हुए शराब कारोबारी विजय माल्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि, कांग्रेस को इस बात का जवाब देना चाहिए कि किंगफिशर के 2011 में बंद होने के बावजूद कांग्रेस नीत सरकार ने दिल खोलकर उसे ऋण क्यों दिया।

जेएनयू में कुछ ताकतें युद्ध छेड़ रही हैं भारत के खिलाफ

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को आरोप लगाया कि जेएनयू में कुछ ताकतें हैं, जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रही हैं। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि ऐसे लोगों को संस्थान के छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ भी देखा गया है। आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कुछ दिन पहले ही वामपंथी समूहों ने जेएनयू छात्रसंघ चुनावों में सभी चार प्रमुख पद जीते हैं।

चुनाव नतीजे सामने आने के बाद RSS समर्थित ABVP और वामपंथी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (आइसा) के सदस्यों के बीच झड़पें भी हुई हैं। मामला पुलिस तक पहुंच गया और दोनों ही पक्षों की ओर से एक दूसरे पर पिटाई के आरोप लगाए गए। इस बाबत सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की गईं। मंगलवार को निर्मला ने कहा कि, कुछ ऐसी ताकतें हैं जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रही हैं और वे छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ भी देखे जाते हैं। इससे मैं असहज महसूस करती हूं।’

राष्ट्रवाद पर देशव्यापी बहस के केंद्र में जेएनयू

भारतीय महिला प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम के दौरान जेएनयू की पूर्व छात्रा निर्मला सीतारमण से विश्वविद्यालय के घटनाक्रम के बारे में सवाल किया गया था। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ वषों में (जेएनयू में) जो चीजें हुई हैं, वे वास्तव में उत्साहजनक नहीं हैं..।’ रक्षा मंत्री ने कहा, ‘पुस्तिकाएं कहती हैं कि, वे भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रहे हैं। उनकी विवरणिकाएं (ब्रोशर) ऐसा कहती हैं। JNUSU का नेतृत्व करनेवाले या छात्रसंघ के सदस्य खुले तौर पर ऐसी ताकतों के साथ शामिल होते हैं, इसलिए भारत विरोधी कहने में आपको संकोच करने की आवश्यकता नहीं है।’

आपको बता दें कि, अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ जेएनयू परिसर में 9 फरवरी 2016 को आयोजित एक कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए थे। इसके बाद राष्ट्रवाद पर देशव्यापी बहस के केंद्र में जेएनयू आ गया था।

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