देश में रोजगार के बढ़ते अवसर

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Employment

राजएक्सप्रेस, भोपाल। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार 2018 में बेरोजगारी की दर भारत में 3.5 प्रतिशत रहेगी, जबकि चीन में 4.8 प्रतिशत होगी। सरकार की चिंता यह है कि देश में 77 प्रतिशत उपलब्ध रोजगार (Employment) असंगठित क्षेत्र में हैं। हालांकि, चीन में यह प्रतिशत 33 है। ऐसे में हमें उन क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा, जो रोजगार तो दे सकते हैं, मगर अब तक विकसित नहीं हो पाए हैं।

जीविकोपार्जन हेतु किए जाने वाले कार्य को रोजगार (Employment) या स्वरोजगार कहते हैं। रोजगार करने वाले प्राय: दूसरे के अधीन कार्य करते हैं, जबकि स्वरोजगार खुद का होता है। शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रबंधक और वकील आदि जब स्कूल व कॉलेज, अस्पताल, कल-कारखाने तथा संस्थान में कार्य करते हैं तो उसे रोजगार कहा जाता है। हालांकि जब वे खुद के स्वामित्व वाले किसी संस्थान में कार्य करते हैं तो उसे स्वरोजगार कहा जाता है। स्वरोजगार ऐसी वृति है, जिसमें व्यक्ति कभी सेवानिवत्त नहीं होता है, जबकि रोजगार करने वाला व्यक्ति एक निश्चित उम्र में सेवानिवृत्त हो जाता है। जीविका के द्वारा जीवनयापन करने के अलावा उन्नति करने के अवसरों को प्राप्त करने की कोशिश की जाती है। इसका अर्थ केवल जीवनयापन नहीं है बल्कि नौकरी में पदों के उच्चतर स्तर पर पहुंचना भी है। वहीं, स्वरोजगार में कारोबारी कारोबार को उच्चतम स्तर तक पहुंचाने का प्रयास करता है। रोजगार या स्वरोजगार में उत्कर्ष पर पहुंचकर व्यक्ति गौरव व शांति का अनुभव करता है। बड़े अर्थो में जीविका को यदि परिभाषित करें तो यह व्यक्ति की जीवन संरचना का महत्वपूर्ण पक्ष है।

जैसे, यदि आप बैंक में परीवीक्षाधीन अधिकारी के पद पर भर्ती होते हैं तो आपका लक्ष्य बैंक का प्रबंध निदेशक या फिर अध्यक्ष बनना होता है। इसी तरह स्वरोजगार करने वाला व्यक्ति भी अपने कारोबार को सफलता के शिखर तक पहुंचाना चाहता है। हर व्यक्ति को किसी न किसी स्तर पर जीवनयापन हेतु किसी न किसी कार्य को करना ही पड़ता है। स्वरोजगार के तहत व्यक्ति खुद तो रोजगार पाता ही है। साथ ही वह दूसरों को भी रोजगार मुहैया कराता है। स्वरोजगार को आज बेरोजगारी दूर करने का सबसे महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। स्वयं का जीवन निर्वाह करने एवं दूसरों को रोजगार मुहैया कराने से हमें खुशी भी दोगुनी-चौगनी मिलती है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार 2018 में बेरोजगारी की दर भारत में 3.5 प्रतिशत रहेगी, जबकि चीन में यही 4.8 प्रतिशत होगी। आईएलओ के मुताबिक भारतीय सरकार की चिंता यह है कि देश में 77 प्रतिशत उपलब्ध रोजगार असंगठित क्षेत्र में हैं। हालांकि, चीन में यह प्रतिशत 33 है।

आईएलओ द्वारा जारी रिपोर्ट द वल्र्ड एंप्लॉयमेंट एंड सोशल आउटलुक ट्रेंड्स 2018 के अनुसार वर्ष 2018 में एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 5.5 प्रतिशत का आर्थिक विकास जारी रहेगा। आईएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक से दो दशकों में भारत के सेवा क्षेत्र में काफी बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं। इसके अनुसार भारत, बांग्लादेश, कंबोडिया और नेपाल में असंगठित क्षेत्र में करीब 90 प्रतिशत कामगार हैं, जिसमें कृषि क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक है। इन देशों में कृषि के साथ-साथ विनिर्माण, थोक व खुदरा कारोबार में बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं। साफ है दक्षिण एशिया में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में भारतीय अर्थव्यवस्था के अहम योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन नेशनल पेंशन स्कीम कर्मचारी राज्य बीमा निगम के आंकड़ों के आधार पर सरकार द्वारा पेरोल डेटा को अप्रैल-2018 में पहली बार जारी किया गया। तदुपरांत श्रम ब्यूरो द्वारा जारी किए जाने वाले तिमाही रोजगार सर्वे की नई श्रृंखला के प्रकाशन को बंद कर दिया गया।

श्रम ब्यूरो द्वारा जारी किया जाने वाला तिमाही आंकड़ा रोजगार सृजन की स्थिति के बारे में बताता है। इसके तहत किसी संस्थान में दस या दस से अधिक की संख्या में रोजगार करने वाले लोगों को सर्वे में शामिल किया जाता है, लेकिन दस की संख्या से नीचे रोजगार करने वालों को इसमें शामिल नहीं किया जाता है। मौजूदा समय में सर्वे का नमूना आकार सर्वे का आधार, सर्वे में शामिल करने वाले कामगारों की संख्या आदि को तार्किक नहीं कहा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर श्रम ब्यूरो के सर्वे में केवल 2.77 करोड़ रोजगार करने वाले कामगार को ही शामिल किया जाता है जबकि आज कामगारों की संख्या 47 करोड़ है। श्रम ब्यूरो के सर्वे में छठे आर्थिक जनगणना के बाद अस्तित्व में आए नए संस्थानों में काम करने वाले कामगारों को शामिल नहीं किया जाता है। ऐसे संस्थान स्वैछिक तरीके से श्रम ब्यूरो को आंकड़े उपलब्ध कराते हैं जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। श्रम ब्यूरो द्वारा जारी तिमाही रोजगार सर्वे में शामिल की जाने वाली ईकाई या फिर संस्थान या राज्य में रोजगार की संख्या को मापने के पैमाने में आए बदलाव के कारण इसकी प्रासंगकिता वर्ष 2015 के पूर्वाद्ध में खत्म हो गई थी।

भारत और वैश्विक स्तर पर रोजगार के आंकड़ों को मापने के पैमाने में निरंतर बदलाव आता रहा है। सरकार भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य डेटा जारी करने वाले संस्थान समय-समय पर डेटा मापने वाले अप्रासंगिक मापक को या तो बंद कर देते हैं अथवा उन्हें युक्तिसंगत बनाने के लिए आवश्यक बदलाव करते हैं। सरकार ने श्रम ब्यूरो के तिमाही सर्वे की नई श्रृंखला साप्ताहिक डब्लूपीआई का डेटा कमोडिटी के अनुसार प्रति दिन जारी किया जाने वाला आयात-निर्यात का डेटा, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का डेटा आदि को युक्तिसंगत नहीं होने के कारण बंद कर दिया है। औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग द्वारा प्रकाशित की जाने वाली औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी के 268 अप्रासंगिक मदों के प्रकाशन को भी बंद कर दिया है। रिजर्व बैंक ने भी अपनी सालाना रिपोर्ट में प्रकाशित की जाने वाली अपेंडिक्स तालिका की संख्या को 66 से कम करके नौ कर दिया है। कहने का तात्पर्य है कि विश्व के दूसरे देशों की तरह भारत में भी अप्रासंगिक रिपोर्टो का बंद करने का चलन बहुत ही पुराना है।

अप्रैल 2018 से हर महीने पेरोल के आंकड़े सरकार ने जारी करना शुरू किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2017 से फरवरी 2018 में औपचारिक क्षेत्र में लगभग 31.1 लाख 48 हजार नए लोगों को रोजगार मिला है। यह अनुमान केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में अंशदान करने वालों की संख्या के आधार पर लगाया है। नीति आयोग के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि के अनुसार सितंबर-2017 से फरवरी-2018 तक पेरोल में 31.1 लाख नए लोगों को रोजगार मिला है। बाद में इसमें संशोधन किया गया, जिससे रोजगार पाने वालों की संख्या और भी बढ़ गई। केंद्र सरकार ने औपचारिक क्षेत्र में मासिक पेरोल रिपोर्टिग की शुरुआत की है। इससे हर माह रोजगार के आंकड़ों का पता लगाया जाएगा। नीति आयोग ने कहा है कि पेरोल का मासिक डेटा अर्थव्यवस्था नए रोजगार और सरकारी नीतियों की साफ तस्वीर पेश करेगा। 25 अप्रैल को उम्र पर आधारित पेरोल डेटा तीन एजेंसियों कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, पेंशन फंड रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी, कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने साझा किया है। इन संस्थानों के डेटा से रोजगार सृजन के नए आंकड़ों का पता पता चला है, जो बताता है कि हर महीने लाखों की संख्या में रोजगार पैदा हो रहे हैं।

देश में रोजगार का सृजन हो रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, नेशनल पेंशन स्कीम व कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकड़ों से इस तथ्य की पुष्टि होती है। संगठन के आंकड़ों के अनुसार सितंबर-2017 से अप्रैल-2018 के दौरान संगठित क्षेत्र में 41 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। इसी संगठन के आंकड़ों के मुताबिक 2018 में संगठित क्षेत्र में लगभग 67 लाख रोजगार पैदा हुए थे। ग्रामीण क्षेत्र में तीन लाख लोग सामान्य सेवा केंद्र चला रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार पैदा हो रहे हैं।
सतीश सिंह (वरिष्ठ पत्रकार)

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