बाजार में गिरावट को संभाला जाए

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Market
राजएक्सप्रेस, भोपाल। 

बिकवाली के दबाव ने शेयर बाजार (Market) को बड़ी गिरावट की ओर धकेल दिया। सोमवार को सेंसेक्स 505.13 अंक जबकि निफ्टी 137.45 अंक टूट गया। बाजार में गिरावट घरेलू कारणों से कहीं ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्मित विवादों की वजहों से बनी है।

पिछले कुछ समय से राहत की बारिश कर रहा शेयर बाजार सोमवार को गोता लगा गया। सेंसेक्स 505.13 अंक (1.33 फीसदी) टूटकर 37 हजार 585.51 जबकि निफ्टी 137.45 अंक (1.19 फीसदी) की कमजोरी के साथ 11 हजार 377.75 पर बंद हुआ। दरअसल, वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध (ग्लोबल ट्रेड वॉर) को लेकर पैदा हुए तनाव से निवेशकों में खलबली मचा दी। वहीं, पिछले सप्ताह सरकार ने गिरते रुपए को थामने और चालू खाता घाटे को पाटने के मकसद से कई कदमों की घोषणा की थी, जो निवेशकों को आश्वस्त करने में असफल रहे। बड़े ब्रोकरेजेज का मानना है कि इसमें कोई बड़ी घोषणा नहीं है और जो भी कदम उठाए गए, उनका फोकस सिर्फ पूंजी आकर्षित करने के लिए नीतियों में बदलाव पर है। रुपए के गिरते स्तर को ऊपर उठाने की योजना नहीं है। डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता रुपया भारतीय लोगों और निवेशकों में डर का माहौल पैदा कर रहा है।

ग्लोबल ट्रेड वॉर और चालू घाटे में बढ़ोतरी की वजह से रुपया फिसलकर 72 तक पहुंच गया। इस वजह से निवेशक शेयर के बजाए म्यूचुअल फंड की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। शेयर बाजार में हुई गिरावट को वैश्विक पैमाने पर आंके तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को 267 अरब डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाने की धमकी दी है। पहले से भी अमेरिकी ने चीन से 200 अरब डॉलर के आयात पर शुल्क लगा रखा है। विश्व की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत पर पड़ रहा है।

चीन के सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से अमेरिका के उन उद्योगों पर असर पड़ेगा जो चीन के सामान को कच्चे माल के तौर पर उपयोग करते हैं। शुक्रवार को जब ट्रंप ने चीन को धमकी दी थी, तब अमेरिका के बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई थी। घरेलू स्तर पर देखें, तो जून तिमाही में मौजूदा चालू खाता घाटा जीडीपी के 2.4 फीसदी हो गया। तेल की कीमतों में तेजी की वजह से भी चालू घाटा बढ़ा है। दरअसल निर्यात और आयात के बीच अंतर चालू घाटा कहा जाता है। रुपए में गिरावट और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से आयात पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है।

इस साल अब तक रुपए में 13 फीसदी की गिरावट आई है। रुपए की इस गिरावट से भी शेयर बाजार दबाव में है। अमेरिका और चीन के बीच तनाव की वजह से एशिया के बाजारों में गिरावट आ रही है। साथ ही एशिया के देशों पर ईरान से तेल खरीदने पर लगे बैन से भी मुश्किल स्थिति बनी हुई है। ऐसे में अनिश्चितता के माहौल को देखते हुए बाजार में गिरावट जारी है। अभी दावे से यह नहीं कहा जा सकता है कि बाजार आने वाले दिनों में फिर से पटरी पर लौट आएगा। यह समय छोटे निवेशकों के लिए सावधानी से काम करने का है। वे वेट एंड वॉच की नीति पर ही ध्यान दें।

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