नासा के सूरज छूने वाले मिशन के पीछे हैं भारतीय मूल के अमेरिकी खगोलशास्त्री सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर

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Subrahmanyan Chandrasekhar

फ्लोरिडा। मानव इतिहास में पहली बार सूरज की सतह के करीब जा रहे नासा के सोलर पार्कर प्रोब की नींव के पीछे भारतीय का हाथ है। जी हां, यह कोई और नहीं बल्कि भारतीय मूल के अमेरिकी खगोलशास्त्री सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (Subrahmanyan Chandrasekhar) थे। 60 साल पहले उनके हस्तक्षेप की वजह से ही सौर हवाओं के अस्तित्व से जुड़ा शोध पत्र प्रकाशित हो सका था।

रविवार सोलर पार्कर प्रोब हुआ लांच
  • रविवार 12 अगस्‍त को नासा की तरफ से सोलर पार्कर प्रोब को लांच किया गया।
  • सोलर पार्कर प्रोब का नाम वैज्ञानिक यूजीन पार्कर के नाम पर रखा गया है।
  • वर्ष 1958 में सोलर पार्कर ने ही पहली बार यह अनुमान पेश किया था कि, सौर हवाओं का अस्तित्व है।
  • इस प्रस्ताविध शोधपत्र के आधार पर ही नासा ने अपना पार्कर प्रोब यान सूरज पर भेजा है।
सोलर पार्कर ने दिया यह सुझाव

वर्ष 1958 में जब 31 साल के पार्कर ने जब यह सुझाव दिया था कि, चार्ज्ड पार्टिकल्स लगातार सूरज से निकलते हैं और अंतरिक्ष में फैलते जा रहे हैं, तो वैज्ञानिक समुदाय ने उनपर भरोसा करने से इंकार कर दिया था। उस समय प्रचलित राय यह थी कि अंतरिक्ष एकदम खाली जगह है।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च में असिस्टेंट प्रोफेसर दिब्येंदु नंदी ने बताया कि, जब सोलर पार्कर ने अपनी थिअरी को विस्तार से बताते हुए अपना पत्र ऐस्ट्रोफिजिकल जर्नल (इस क्षेत्र की सबसे प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल) को सौंपा तो इसे 2 बार अलग- अलग समीक्षकों ने खारिज कर दिया।

प्रोफेसर दिब्येंदु नंदी ने बताया…

उस समय ऐस्ट्रोफिजिकल जर्नल के सीनियर एडिटर ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों समीक्षकों का फैसला पलटा और पार्कर के अनुमान को प्रकाशित करने की इजाजत दी। वह एडिटर और कोई नहीं बल्कि भारतीय- अमेरिकी खगोलशास्त्री सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर थे। चंद्रशेखर को वर्ष 1983 में भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

पार्कर सोलर की खासियत 

नासा का ऐतिहासिक पार्कर सोलर प्रोब यान सूरज की सतह के सबसे करीब 40 लाख मील की दूरी से गुजरेगा। यह मिशन जब सूरज के सबसे करीब से गुजरेगा तो वहां का तापमान 2500 डिग्री सेल्सियस तक होगा। इस प्रॉजेक्ट को संभव बनाने के लिए नासा ने 103 अरब रुपए खर्च किए हैं। यह मिशन अगले 7 सालों में सूरज के वायुमंडल ‘कोरोना’ का करीब से अध्ययन करेगा।

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