तारागढ किला (Taragarh Fort) राजस्थान में अरावली पर्वत पर स्थित है। यह किला नागपहाड़ी पर बना एक शानदार किला हैं। इस किले को बूंदी का किला भी कहा जाता हैं और यह एक तेज ढलान पर स्थित है। यहाँ से शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। इस किले में पानी के 3 तलाब हैं, जो कभी नहीं सूखते। राजस्थान आने वालों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं। इसकी शानदार बनावट और सुंदरता देखने लायक है।

तारागढ़ किले का इतिहास

ऐसा कहा जाता है कि, तारागढ़ एक ऐसा किला था जो भारत में सबसे पहले पहाड़ी पर बना था। इस क़िले का निर्माण 11वीं सदी में सम्राट अजय पाल चौहान ने विदेशी या तुर्को के आक्रमणों से सुरक्षा हेतु बनवाया था। बूंदी का किला (Taragarh Fort) 1426 फीट ऊचें पर्वत शिखर पर बना है मेवाड़ के एक शासक पृथ्वीराज सिसोदिया ने अपनी पत्नी “तारा” के कहने पर इसको पुनःविकसित किया गया। जिसके कारण यह तारागढ़ के नाम से प्रसिद्ध है। यह किला 1 हजार 885 फीट ऊंचे पर्वत पर 2 वर्ग मील में फैला हुआ है।

इस किले ने आज तक राजपूत, मुस्लिम, मराठा और ब्रिटिश की कई लड़ाई और शासकों को देखा है। किले में हज़रत मीरान सईद हुसैन असगर खंगसुवर का एक ऐतिहासिक दरगाह है जो अजमेर के गवर्नर थे, उस समय सुल्तान शहाबुद्दीन घोरी शासक थे। लेकिन कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद, चौहान और राजपूत शासकों ने किले पर हमला किया और मिरान सैयद हुसैन असगर खंगसूवर को वहां मार दिया गया।

Taragarh Fortतारागढ़ किले (Taragarh Fort) में देखने लायक जगह

  • मोती महल
  • इन्दरगढ़ फोर्ट
  • गढ़ महल
  • छत्रमहल
  • अनिरूद्ध महल
  • रतन महल
  • बादल महल
  • भीम बुर्ज
  • रतन दौलत
  • फुल महल आदि है।

तारागढ़ किले पर किन-किन राजाओं का रहा अधिकार

 Taragarh Fort पर 1192 में गौरी का अधिकार, 1202 राजपूतों का आधिपत्य, 1226 में सुल्तान इल्तुतमश के अधीन, 1242 में सुल्तान अलाउद्दीन मसूद का कब्जा, 1364 में महाराणा क्षेत्र सिंह का अधिकार, 1405 में चूण्डा राठौड़ का प्रभुत्व, 1455 में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी का अधिकार, 1505 में मेवाड़ के सिसोदिया राजपूतों का कब्जा, 1535 में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह का अधिकार, 1538 में जोधपुर के राजा मालदेव का प्रभुत्व, 1557 में हाजी खां पठान का कब्जा, 1558 में मुगलों का अधिकार और सन 1818 में इस किले पर अंग्रेजों का अधिकार रहा था।

तारागढ़ किले की बनावट

इस किले (Taragarh Fort) में 7 पानी के झालरे भी बने हुए हैं। यह दुर्ग अपने गौरवशाली इतिहास के लिए भी मशहूर है। इस किले मे अंदर जाने के लिए 3 विशाल द्वार बनाए गए हैं और इन प्रवेश द्वार के नाम लक्ष्मी पोल, फूटा पोल और गागुड़ी का फाटक के नाम से जाने जातें है। महल के दरवाजे पर हाथी पोल पर बनी विशाल हाथियों की जोड़ी है। यह महल बहुत ही भव्य और सुन्दर हैं। किले में एक रानी महल है जो परिसर के भीतर एक छोटा महल है, और यह राजाओं की पत्नियों और रखैल के लिए बनाया गया है।

Taragarh Fort दुनिया का दूसरा “जिब्राल्टर” (Gibraltar)

सन् 1832 में भारत के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिक ने तारागढ़ किले को देखा तो उनके मुंह से निकल पड़ा- ”ओह दुनिया का दूसरा जिब्राल्टर” और मुगल बादशाह अकबर ने तो इसकी महानता को समझकर अजमेर को अपने साम्राज्य का सबसे बड़ा सूबा बनाया था। तारागढ़ का ये इतिहास हैं कि, यह किला दुर्ग के द्वार पर कभी लड़ाई में नहीं हारा। दरअसल जिब्राल्टर यूरोप (Europe) के दक्षिणी छोर पर भूमध्य सागर के किनारे स्थित एक स्वशासी ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र है। जिब्राल्टर ब्रिटेन के सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार रहा है। जिब्राल्टर चट्टानी प्रायद्वीप से घिरा हुआ है। यहां कई प्राकृतिक गुफाएं भी हैं। जो देखने योग्य हैं।

तारागढ़ किले (Taragarh Fort) तक कैसे जाये
  • तारागढ़ किले तक हम सड़क मार्ग, रेलवे मार्ग, हवाई मार्ग से पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग से आने पर किशनगढ एयरपोर्ट हैं जो इस किले से 26 किमी की दुरी पर स्थित है फिर जहाँ से बस या अन्य साधनो का उपयोग कर सकते हैं।
  • इस किले के पास रेलवे स्टेशन हैं, जो अजमेर से लगभग 4 किमी की दुरी पर स्थित है, जो भारत के सभी मुख्य शहर को जोड़ता हैं।
  • यहां का बस स्टॉप अजमेर से 5 किमी की दुरी पर स्थित है और जहाँ से किले तक पंहुचने के लिए किसी भी प्रकार का वाहन या परिवहन का उपयोग कर सकते हैं।
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