हर साल की तरह इस साल भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra) निकाली जा रही है। यह यात्रा ओडिशा के पूरी में 14 जुलाई 2018 को 141वी रथ यात्रा है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को निकाली जाने वाली इस यात्रा में देश भर से लाखों श्रद्धालु भक्त गण इसमें हिस्सा लेते है। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने घर अर्थात जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए निकलते है। गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी जी का घर है।

ऐसा माना जाता है कि, इस रथ यात्रा में भाग लेने वाले भक्तों के सभी कष्ट और दुःख दूर हो जाते है। जो भी व्यक्ति भगवान के इन विशाल रथों को खींचने में सहायता करता है। उस व्यक्ति पर भगवान जगन्नाथ की सदैव कृपा बनी रहती है। इतना ही नहीं ऐसा माना जाता है कि, जो व्यक्ति रथ को खींचता है उसे मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।

यूनेस्को ने विश्व धरोहर माना –

यूनेस्को द्वारा पुरी के एक हिस्से को वैश्विक धरोहर की सूची में शामिल किए जाने के बाद भगवान जगन्नाथ की यह पहली रथ यात्रा है। इस वर्ष रथ यात्रा की थीम ‘धरोहर’ रखी गयी है। आज है भगवान जगन्नाथ ( Jagannath ) की 141वी रथ यात्रा ( Rath Yatra ) जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुडी ख़ास बातें।आपको जगन्नाथ मंदिर की आज कुछ रोचक बाते भी आपसे साँझा करेंगे। भगवान् जगन्नाथ की अनेकों लीलाएं है। जिसे हम सुनते और सुनाते आ रहे है। लेकिन आज हम आपको भगवान जगन्नाथ के मंदिर से जुडी हुई कुछ ख़ास बातें आपको बताएँगे।

यहाँ झंडा हवा के विपरीत दिशा में लहरता है –आज है भगवान जगन्नाथ ( Jagannath ) की 141वी रथ यात्रा ( Rath Yatra ) जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुडी ख़ास बातें।

भारत में प्राचीन एवं विशाल अनेकों मंदिर है। उन्ही में से एक मंदिर भगवान् जगन्नाथ का मंदिर है। आपको इस मंदिर से जुडी कुछ हैरान करने वाली बात बताएँगे। भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लहराता झंडा सदैव हवा के विपरीत दिशा में ही उड़ता है। यही बात सबको अचंभित कर देती है। क्योंकि अक्सर जब भी कही झंडा लगा होता है। वो हवा की चलने की दिशा में ही लहराता है। किन्तु जगन्नाथ में इसके विपरीत होता है। मंदिर के शिखर पर लगा झंडा हवा से विपरीत दिशा में ही लहराता है।

मंदिर की परछाई दिखाई नहीं देती – आज है भगवान जगन्नाथ ( Jagannath ) की 141वी रथ यात्रा ( Rath Yatra ) जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुडी ख़ास बातें।

भगवान जगन्नाथ मंदिर की कभी भी दिन में मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई दिखाई नहीं देती है। सूर्य उदय से लेकर सूर्य अस्त तक मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई किसी भी पहर में नहीं दिखना किसी को भी अचंभित कर देता है। वैसे भगवान के भक्तों का मानना है यह भगवान् जगन्नाथ की अद्भुत लीला है। एवं मंदिर के शिखर पर लगा हुआ झंडा हर रोज बदला जाता है। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि, अगर वो यह झंडा रोज नहीं बदलेंगे तो मंदिर 18 वर्ष के लिए बंद हो जायेगा। इसलिए मंदिर के शिखर पर लगा हुआ झंडा हर रोज बदला जाता है।

सुदर्शन चक्र की महिमा –आज है भगवान जगन्नाथ ( Jagannath ) की 141वी रथ यात्रा ( Rath Yatra ) जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुडी ख़ास बातें।

आपको इस मंदिर के बारे में एक और बात जानकार हैरानी होगी कि, भगवन जगन्नाथ के इस मंदिर के शिखर पर ही एक सुदर्शन चक्र भी लगा हुआ है। इस चक्र को आप जब किसी भी दिशा में खड़े होकर देखते है तब यह सुदर्शन चक्र आपको अपने सामने ही दिखाई देता है। यह सच में हैरान कर देने वाली बात है। वैसे आपको बता दे कि, सुदर्शन चक्र, भगवान विष्णु का शस्त्र है। इस चक्र को भगवान विष्णु ने धारण कर रखा है एवं भगवान विष्णु के 8 वे अवतार माने जाने वाले हरे कृष्णा ने भी यह सुदर्शन चक्र धारण किया था।

पक्षी जगन्नाथ मंदिर के ऊपर नहीं उड़ते – आज है भगवान जगन्नाथ ( Jagannath ) की 141वी रथ यात्रा ( Rath Yatra ) जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुडी ख़ास बातें।

इस मंदिर के अनेकों रहस्यों में से एक रहस्य यह भी है कि, इस मंदिर के ऊपर से कोई भी पक्षी नहीं गुजरता एवं इस मंदिर के शिखर पर भी नहीं बैठता है। जबकि ऐसा सिर्फ इसी मंदिर पर होता है अन्यथा सामान्य तौर पर देखा गया है कि, मंदिरों की चोटियों पर पक्षी उड़ते भी है और बैठते भी है।

रसोई में भी होती है जगन्नाथ की लीला – आज है भगवान जगन्नाथ ( Jagannath ) की 141वी रथ यात्रा ( Rath Yatra ) जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुडी ख़ास बातें।

भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर दिन भगवान के भक्तों के लिए भंडारा किया जाता है। मंदिर की रसोई में भक्तों के लिए प्रसाद बनाया जाता है। लेकिन इसमें यह ख़ास बात है कि भक्तों के लिए बनने वाले प्रसाद को सात बर्तन में एक दूसरे के ऊपर रखकर बनाया जाता है। इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का प्रसाद जल्दी बन कर तैयार होता है। फिर उससे नीचे वाले बर्तन का प्रसाद तैयार होता है। भगवान जगन्नाथ को 56 भोजन खिलाने की प्रथा है। इसलिए भगवान के लिए 56 प्रकार के भोजन बनाये जाते है। जगन्नाथ मंदिर का भोजनालय दुनिया का सबसे बड़ा भोजनालय है।

जगन्नाथ मंदिर के भीतर से सुनाई लेती है लहरों की ध्वनि –आज है भगवान जगन्नाथ ( Jagannath ) की 141वी रथ यात्रा ( Rath Yatra ) जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुडी ख़ास बातें।

इस मंदिर के सिंहद्वार पर प्रवेश करने पर आपको किसी तरह की सागर की लहरें सुनाई नहीं देंगी किन्तु जब आप द्वार से कदम बाहर रखते है तो, सागर की लहरों की ध्वनि का संगीत साफ़ सुनाई देने लगता है। यह ध्वनि मंदिर के भीतर से आती है। आज तक कोई यह पता नहीं लगा पाया सागर की ध्वनि मंदिर के अंदर से ही क्यों सुनाई देती है।

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