आइये जाने कैसे एक छोटी सी घटना ने सीरिया में लिया सिविल वॉर का रूप

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आइये जाने कैसे एक छोटी सी घटना ने सीरिया (Syria) में लिया सिविल वॉर का रूप सीरिया आधिकारिक रूप से सीरियाई अरब गणराज्य दक्षिण-पश्चिम एशिया का एक राष्ट्र है। सीरिया नाम प्राचीन ग्रीक से आया है। सीरिया की राजधानी दमिश्क है जो उमय्यद ख़िलाफ़त तथा मामलुक साम्राज्य की राजधानी रह चुका है। सीरिया इसराइल तथा इराक़ के बीच स्थित होने के कारण यह मध्य-पूर्व का एक महत्वपूर्ण देश है। 2011 में हुई एक छोटी सी घटना ने सीरिया में सिविल वॉर (Syrian Civil War) का रूप ले लिया। कुछ मुट्ठीभर बच्चों की गिरफ्तारी से शुरू हुआ ये संघर्ष सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद दुनिया के लिए अब तक का सबसे बड़ा मानवीय संकट बन चुका है। देश के राष्ट्रपति बशर-अल-असद के खिलाफ शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों और संघर्ष में अब तक तीन लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, करीब एक करोड़ से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं, जो यहां की आबादी का आधा हिस्सा हैं।

सीरिया (Syria) युद्ध:
कैसे हुई युद्ध की शुरुआत ??

संघर्ष शुरू होने से पहले ज़्यादातर सीरियाई नागरिकों के बीच भारी बेरोज़गारी, व्यापक भ्रष्टाचार, राजनीतिक स्वतंत्रता का अभाव और राष्ट्रपति बशर-अल-असद के दमन के ख़िलाफ़ निराशा थी। अरब के कई देशों में सत्ता के ख़िलाफ़ शुरू हुई बगावत से प्रेरित होकर मार्च 2011 में सीरिया के दक्षिणी शहर दाराआ में भी लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन शुरू हुआ था। सीरिया के नागरिकों ने असद सरकार से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी और राष्ट्रीय स्तर पर युद्ध प्रदर्शन शुरू हो गया। आंदोलन लगातर तेज होता चला गया और विरोधी पक्ष ने हथियार उठा लिए और उन हथियारों के बल पर सरकारी सुरक्षा बलो को भगाना शुरू कर दिया असद ने इस विद्रोह को कुचलने के लिए और अपनी सत्ता फिर से हथियाने के लिए सीरिया पर आक्रमण कर दिया और अलेप्पो दमिश्क में भारी तबाही मचाई।

हस्तक्षेप:
सीरिया युद्ध में अमेरिका का हस्तक्षेप:

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अगस्त 2012 में पहली बार सीरिया में रेड लाइन का एलान किया और देश के लोगों पर केमिकल हथियार का इस्तेमाल न करने के लिए आगाह किया। फरवरी 2013 में अमेरिका ने विद्रोहियों को मदद पहुंचाने का वादा किया। उसने सीरिया में विद्रोहियों को दवा और खाने के जरिए मदद पहुंचाने की बात कही और मदद पहुंचाई। इन दो सालों के संघर्ष में 60 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके थे और लाखों लोग देश छोड़ चुके थे।

सीरिया युद्ध में यूरोपीय संघ का हस्तक्षेप:

मई 2013 में यूरोपीय संघ ने सीरिया पर से हथियार को लेकर प्रतिबंध हटा दिया और विद्रोहियों को हथियार और ट्रेनिंग देने का रास्ता खोल दिया।

सीरिया युद्ध में रूस का हस्तक्षेप:

रूस ने सीरिया की असद सरकार को व्यापक रूप से हथियार सप्लाई करने शुरू कर दिए और सारे प्रतिबन्ध हटा दिए।

इस्लामिक स्टेट (ISIS) का सीरिया मे उदय: (Islamic State आइये जाने कैसे एक छोटी सी घटना ने सीरिया (Syria) में लिया सिविल वॉर का रूप of Iraq and Syria)

इन तीनों (अमेरिका, यूरोपीय संघ और रूस) के हस्तक्षेप के कारण ही सीरिया में विद्रोहियों का दबदबा कायम रहा और बढ़ता चला गया और बाद में इन्ही विद्रोहियों ने एक आतंकी संगठन का रूप ले लिया जिसे इस्लामिक स्टेट कहा जाता है और आज यही आतंकी संगठन या इस्लामिक स्टेट अमेरिका और रूस का सर दर्द बन गया है। 2013 के बसंत में इस्लामिक स्टेट ने रक्का शहर पर कब्जा कर सीरिया में आगमन किया । 2004 में इराक में अलकायदा नाम के आतंकी संगठन की शुरुआत हुई । अबु-बक्र-अल-बगदादी के नेतृत्व वाले इस संगठन का मकसद सीरिया में सख्त इस्लामिक विचारधारा लागू कराना है।

हवाई हमले:
  • अमेरिका और रूस के हस्तक्षेप से बने इस संगठन से हो रहे सिर दर्द को दूर करने के लिए बारी-बारी हवाई हमले शुरू किये।
  • सितंबर 2014 में अमेरिकी जेट्स ने सीरिया में आईएस आतंकियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। अमेरिका के साथ गठबंधन देशों में सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन और UAE भी शामिल हो गए।
  • जनवरी 2015 में सीरिया में ISIS के साथ चार महीने की जंग के बाद कुर्दिश फाइटर्स ने कोबानी शहर को दोबारा आतंकियों से अपने कब्जे में ले लिया। यहां पहली बार ISIS ने अपनी हार मानी थी। इसके बाद इसी साल मई से अगस्त के दौरान ISIS ने यहां के प्राचीन शहर पालमीरा को अपने कब्जे में ले लिया।
  • सितंबर 2015 में रूस सीरिया के संघर्ष में शामिल हो गया। 30 सितंबर को सीरिया में हवाई हमले के लिए रूस की पार्लियामेंट में प्रपोजल पास हुआ और उसी दिन शाम को होम्स पर रूस ने पहले हवाई हमले को अंजाम दिया।
  • हवाई हमलों ने इस्लामिक स्टेट की नीव हिला कर रख दी और ISIS के जहा जहा कब्जे थे उनमे से कुछ शहरो को छोड़ कर सभी जगह से ISIS का खात्मा कर दिया गया और अब ISIS कुछ शहरो तक ही सिमट कर रह गया है और अबु बक्र अल बगदादी अब छुपा छुपा फिर रहा है।
यूनेस्को ने एक फरमान:

यूनेस्को ने एक फरमान जारी किया था। उस फरमान के मुताबिक जो इन स्टैट्स को छुड़ाने के लिए हवाई हमले हो रहे है एवं जो युद्ध चल रहा है, उसे रोक दिया जाये। परन्तु अमेरिका और रूस चाह रहे है कि, ISIS का पूरा सफाया किया जाए। उसके बाद से लगातार हवाई हमले चल रहे है, जिसमे हजारो बेगुनाह लोगो की जाने चली गई और आज भी जा रही है। इन मरने वाले लोगो का हाल गेहूं में घुन के समान हो गया है। इन मरने वालो की संख्या में बच्चे और महिलाये भी शामिल है। इन लगातार हवाई हमलो के कारण बहुत नुकसान हुआ है और हो रहा है। अब देखना यह है कि इसका अंत क्या होता है और कब होता है?

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