भरोसे के काबिल नहीं हैं बाजवा

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Kashmir Issue

राजएक्सप्रेस, भोपाल। कश्मीर मुद्दे (Kashmir Issue) पर हमेशा विवादित और भड़काऊ बयान देने वाले पाकिस्तान का रुख अब नरम दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख (Military General) ने कहा कि, भारत और पाकिस्तान के विवादित मुद्दों को बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है। वैसे, बाजवा के नरम सुर पहली बार नहीं सुनाई पड़े हैं। पिछले साल सितंबर और दिसंबर माह में भी उन्होंने ऐसा ही राग अलापा था, लेकिन आज तक कोई पहल नहीं की। वैसे, पाक का इतिहास भी भरोसे के काबिल नहीं है।

Kashmir Issues: कश्मीर मुद्दे पर हमेशा विवादित और भड़काऊ बयान देने वाले पाकिस्तान का रुख अब नरम दिखाई दे रहा है। पाक के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा (Kamar Javed Bajwa) ने हाल ही में कश्मीर मुद्दे पर बयान दिया है। उनके बयान से ऐसा प्रतीत होता दिखा रहा है कि पाकिस्तान अब शांति के साथ भारत से अपने विवादित मुद्दों पर बात करना चाहता है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने कहा कि, भारत और पाकिस्तान के विवादित मुद्दों को बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लिए एक संवेदनशील है। बाजवा के इस बयान के बाद थोड़ी देर के लिए निश्चिंत हुआ जा सकता है, मगर दीर्घकालिक अवस्था में यह बयान खारिज करने योग्य है, क्योंकि बातचीत की बात करते-करते बाजवा अपनी आदत के अनुसार भारत को धमकी देना भी नहीं भूले। उन्होंने कहा, पाकिस्तान शांतिप्रिय देश है और हम हमारे पड़ोसी देश तथा विश्व के सभी देशों के साथ सामंजस्य और शांतिपूर्ण सहयोग चाहते हैं, लेकिन हमारी इस शांतिप्रिय भावना को कमजोरी न समझा जाए। हमारी सेना किसी भी परिस्थिति से निपटने में सक्षम है और हम मुंहतोड़ जवाब देना भी जानते हैं। पाकिस्तान की यह दोमुंही बातें ही समस्या को हर स्तर पर बढ़ावा दे रही हैं।

वैसे, बाजवा के नरम सुर पहली बार नहीं सुनाई पड़े हैं। पिछले साल सितंबर और दिसंबर माह में भी उन्होंने ऐसा ही राग अलापा था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आधिकारिक रूप से अपनी सेना को भारत को जोरदार जवाब देने का आदेश भी दिया था। कई मौकों पर बाजवा एलओसी पर जाकर अपने जवानों को हमले करने का निर्देश दे चुके हैं। अभी कुछ ही दिन पहले पाक के प्रधानमंत्री अब्बासी संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर राग अलापते हुए भारत को काफी बुरा-भला कह चुके हैं। तो यह कैसे मान लिया जाए कि पाक वाकई बातचीत से मुद्दे को हल कर लेगा। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भी पाकिस्तान को मौका मिला है, उसने कश्मीर का राग अलापा है। कश्मीर को हड़पने की कोशिश में पाक ने कश्मीर के लोगों को भड़काने के अलावा अलगाववादियों को आर्थिक मदद भी दी, लेकिन वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो
सका। वहीं दूसरी तरफ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पाक को कश्मीर मुद्दे और आतंकवाद पर काफी निंदा का सामना करना पड़ा था।

ऐसे में पाक आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि सुधारने के तौर पर ही देखा जा रहा है। भारत के संबंध बेहतर बनाने के रूप में नहीं। पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी के कैडेट्स की पासिंग आउट परेड के दौरान बाजवा ने कहा, हम ईमानदारी से मानते है कि कश्मीर मुद्दे सहित और भी विवादित मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकाल सकते है। बाजवा ने कहा, यह व्यापक और सार्थक बातचीत से ही संभव है। हालांकि यह बातचीत किसी एक पक्ष के लिए नहीं है, लेकिन पूरे क्षेत्र में शांति बनी रहे इसके लिए यह करना अनिवार्य है। अगर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आज बातचीत का राग अलाप रहे हैं, तो क्या उन्हें बताने की जरूरत पड़ेगी कि भारत ने शांतिपूर्ण तरीके से कितनी बार पहल की है।

भारत ने पाकिस्तान से संबंध सुधारने के लिए वह सब किया, जो एक पड़ोसी को करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तय कार्यक्रम के बिना नवाज शरीफ के बुलावे पर पाकिस्तान तक होकर आए। यह संबंध सुधारने का सबसे बेहतर मौका था, मगर सेना को यह रास नहीं आया। पनामा गेट प्रकरण के बहाने अब पाकिस्तान में नवाज की राजनीति तक खत्म कर डाली। अब उसी सेना के प्रमुख भारत से बातचीत के जरिए विवाद हल करने की बात कह रहे हैं। वैसे, भारत आज भी पाकिस्तान से संबंध सुधारने को तैयार है। मगर वह पहले आतंकवाद का रास्ता छोड़े और सीमा पर फायरिंग करना बंद करे। भारत पहले ही कह चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती। यानी भारत ने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कर दिया है। अब फैसला पाक को करना है कि वह किस राह पर चलेगा। इसलिए बाजवा को चाहिए कि वे भारत को क्या करना है और क्या नहीं, बताना बंद करें तथा अपने देश को बेहतर
और तरक्की के मार्ग पर ले जाने का प्रयत्न करें।

एक तरफ बाजवा कह रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान को बातचीत से कश्मीर मुद्दा हल करना चाहिए, वहीं खुफिया रिपोर्ट आ रही है कि पाकिस्तान बॉर्डर पर नई चालबाजी कर भारत को परेशान करने की कोशिश कर रहा है। खुफिया रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान सीमा पर अपनी सेना को बढ़ा रहा है। रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान ने अपनी 62वीं इन्फेंट्री की संख्या को मार्च और अप्रैल के महीने में सीमा पर कई गुना बढ़ा दिया गया है। सूत्रों की मानें तो सीजफायर का उल्लंघन करने के लिए पाकिस्तान ने 210 से ज्यादा जवानों की संख्या बढ़ा दी है। इसके अलावा पाकिस्तान ने 14 नए आर्मी पोस्ट भी बना दिए हैं, जिसके जरिए पाकिस्तान फायरिंग करने की नई कोशिशें तलाश रहा है। सर्दी में पाकिस्तान  आतंकी घुसपैठ करने में नाकाम रहा था, जिसके कारण अब वो बौखला गया है। यही कारण है कि गर्मियों में आतंकी घुसपैठ करवाने के लिए अपनी सेना की संख्या बढ़ाने में जुट गया है। इस बीच बीएसएफ ने गृह मंत्रालय को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें बताया गया है कि पाक रेंजर्स को पाकिस्तानी सेना लगातार मदद कर रही है। बीएसएफ ने अपनी एक रिपोर्ट में गृह मंत्रालय को बताया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार पाकिस्तान आर्मी, पाकिस्तान रेंजर्स के साथ मिलकर भारत की सुरक्षा की रेकी कर रही है। यह स्थिति पाकिस्तान की उस नापाक हरकत को उजागर करती है, जिसमें उस पर भरोसा करना कठिन है। अब कैसे यकीन कर लें कि पाकिस्तान अगर बातचीत का राग अलाप रहा है, तो उसके सुर आगे चलकर बिगड़ेंगे नहीं।

पाकिस्तान के अब तक के व्यवहार व रुख से स्पष्ट है कि, उसकी दिलचस्पी कश्मीर मसले के समाधान के बजाय उसे उलझाए रखने में ज्यादा है। इसलिए वह इस पर ठोस पहलकदमी के बदले अंतरराष्ट्रीय मंचों से उठाने में ज्यादा चतुराई समझता है। सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का जिक्र तो वह करता है, लेकिन यह भूल जाता है कि इस प्रस्ताव के तहत उसे पहले पाक अधिकृत कश्मीर को खाली करना होगा। शिमला समझौते और फरवरी-1999 के लाहौर घोषणा-पत्र में दर्ज प्रतिज्ञाओं से वह हमेशा मुकरता रहा है। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का विलाप उसकी छटपटाहट से ज्यादा कुछ नहीं है। आतंकवाद के मुद्दे पर वह बेनकाब हो चुका है। अमेरिका ने हाफिज सईद और उसके संगठन को आतंकवादियों की सूची में डाल दिया है। सुरक्षा परिषद ने आतंकियों की जो सूची जारी की, उसमें सबसे ज्यादा लोग पाकिस्तान के हैं। ऐसे में यह फैसला करने के लिए कि आतंकवादी कौन है और कौन नहीं, यह सूची अपने में पर्याप्त सबूत है।
डॉ. श्रीकांत अवस्थी (सामरिक मामलों के जानकार)

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