एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) एक विख्‍यात जर्मनी राजनेता एवं तानाशाह थे। हिटलर “राष्ट्रीय समाजवादी जर्मन कामगार पार्टी” (NSDAP) के राजनेता थे। एडोल्फ हिटलर ने सन् 1933 से सन् 1945 तक जर्मनी पर राज किया था। हिटलर को द्वितीय विश्वयुद्ध के लिये सर्वाधिक जिम्मेदार माना जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध तब हुआ था, जब हिटलर के आदेश पर नात्सी सेना ने पोलैंड पर आक्रमण किया था।

एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) का जीवन परिचय :

एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) का जन्‍म आस्ट्रिया में 20 अप्रैल 1889 को हुआ था। उनकी शुरूआती शिक्षा लिंज नामक स्थान पर हुईं थी। एडोल्फ हिटलर का 6 वर्ष की उम्र में गांव के स्‍कूल में दाखिला करवा दिया गया था। हिटलर के पिता ऑस्ट्रियन सिविल सेवा में काम करते थे। जहां की सेवा से वे सेवानिवृत हो चुके थे। हिटलर को अध्‍यापक स्‍कूल में अनुशासन से रखते थे। स्‍कूल से घर आने पर उनके पिताजी सख्‍त रूख अपनाते थे। 3 जनवरी सन् 1903 को एडोल्फ हिटलर के पिता की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी।

पिता की मृत्यु के बाद 17 वर्ष की आयु में एडोल्फ हिटलर वियना गए। कला विद्यालय में दाखिला न मिलने पर वे पोस्ट कार्डों पर चित्र बनाकर अपना जीवन व्‍यतीत करने लगे। उसी वक्‍त से हिटलर साम्यवादियों और यहूदियों से नफरत करने लगे थे। जब प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हुआ तब वे सेना में भर्ती हुए। एडोल्फ हिटलर ने फ्रांस की कई लड़ाइयों में भाग लिया था। सन् 1918 के युद्ध में घायल होने पर हिटलर अस्पताल में भर्ती रहें। हिटलर को युद्ध में जर्मनी की हार का बहुत दु:ख हुआ था।

 यहूदियों से नफरत :

एडोल्फ हिटलर ने सन् 1919 में सेना छोड़ दी और नाजी पार्टी (नेशनल सोशलिस्टिक आर्बिटर पार्टी) का गठन किया था। उनका उद्देश्‍य साम्यवादियों और यहूदियों से सब अधिकार छीनना था। एडोल्फ हिटलर का ऐसा मानना था कि, साम्यवादियों और यहूदियों के कारण ही जर्मनी की हार हुई थी। जर्मनी की हार से हिटलर के अंदर जो नफरत की भावना थी, वो हज़ारों जर्मन वासियों की भावना से मेल खाती थी। इसी कारण से नाजी पार्टी के सदस्यों में देशप्रेम कूट-कूटकर भरा था।

एडोल्फ हिटलर ने स्वास्तिक को अपने दल का चिह्र बनाया था, जो कि हिन्दुओं का शुभ चिह्र हैं। हिटलर ने अपने दल के सिद्धांतों का प्रचार जनता में किया था। एडोल्फ हिटलर नें भूरे रंग की पोशाक पहनाकर एक सैनिकों की टुकड़ी तैयार की थी। सन् 1923 में एडोल्फ हिटलर ने जर्मन की सरकार को हटाने की कोशिश की थी। लेकिन हिटलर इस कार्य में नाकामयाब रहें। 20 फरवरी सन् 1924 को एडोल्फ हिटलर पर “राष्ट्रद्रोह” का मुकदमा चलाया गया था। इस मुकदमें में उन्‍हें पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई थी।

Adolf Hitler बने राष्‍ट्रपति :

सन् 1933 में एडोल्फ हिटलर के चांसलर बनते ही जर्मन की संसद को भंग कर दिया था। एडोल्फ हिटलर ने साम्यवादी दल को गैरकानूनी घोषित किया और जोज़ेफ गोयबल्स को अपना प्रचारमंत्री चुना था। हिटलर ने नाज़ी दल के विपक्षी व्यक्तियों को कैदखानों में डाल दिया और कानून बनाने की सारी शक्तियां अपने हाथों में ले ली थी। सन् 1934 में हिंडनबर्ग की मृत्यु के पश्चात् एडोल्फ हिटलर राष्ट्रपति बन गए। नाजी दल का आतंक प्रत्येक क्षेत्र में छा गया, उसी बीच तक लाखों यहूदियों को मौत के घाट उतार दिया था।

एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) का प्रथम विश्व युद्ध में प्रदर्शन :

प्रथम विश्व युद्ध के शुरू होने के पहले एडोल्फ हिटलर 16 वीं बवेरियन इन्फेंट्री रेजिमेंट में शामिल थे। बाद में प्रथम विश्व युद्ध छिड़ा, तब वे एक धावक के रूप में यूरोपीय शक्तियों और अमेरिका के खिलाफ सेवारत थे। युद्ध के समय उन्होंने विशिष्टिता के साथ जर्मनी के पश्चिमी मोर्चे पर लड़ाई लड़ी थी। युद्ध में एडोल्फ हिटलर एक साहसी और सक्षम सैनिक साबित हुए, युद्ध में हिटलर दो बार घायल हुए थे। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें पहले आयरन क्रॉस से सम्मानित भी किया गया था।

Adolf Hitler का द्वितीय विश्व युद्ध में अपराध :

एडोल्फ हिटलर नें 1 सितंबर 1939 में यूरोप पर नियंत्रण पाने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध की शुरूआत की थी। हिटलर संपूर्ण ब्रिटेन में अपना आधिपत्य जमाना चाहते थे। इसके लिए कई राज्यों से उन्होंने संधि की और कई राज्यों को अपने वश में कर लिया था। हिटलर ने धीरे-धीरे कई राज्‍यों पर अपना अधिकार जमा लिया था। इसी वजह से युद्ध की शुरूआत हुई।

एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में नाज़ी साम्राज्य ने कई मिलियन यहूदियों का नरसंहार किया था। लाखों लोगों ने इस नरसंहार को अपनी आँखों से देखा था। देखा जाय तो युद्ध में बहुत से सैनिक और नागरिक मारे गए थे। यही यूरोप का द्वितीय युद्ध विश्व था द्वितीय विश्व युद्ध में कुल मारे गए सैनिक और नागरिको की संख्या का हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते। ऐसा नरसंहार इतिहास में कही देखने नही मिलेंगा।

Adolf Hitler के कुछ रोचक तथ्‍य :

  • जर्मन के तानाशाह हिटलर कभी अच्छी पढ़ाई नहीं कर पाए। वे कभी कॉलेज नहीं गये।
  • बचपन में एडोल्फ हिटलर पादरी बनने का सपना देखा करता थे।
  • आधुनिक इतिहास में हिटलर वह पहला इंसान था, जिसने धूम्रपान विरोधी अभियान का आगाज किया।
  • इतने नरसंहार करवाने के बाद भी हिटलर शुद्ध रूप से शाकाहारी था।
  • हिटलर ने पशु क्रूरता के खिलाफ एक कानून बनाया था।
  • दुसरे विश्व युद्ध में जाती नीति के कारण कई लोगों की मौत हुई थी।
  • हिटलर चार्ली चैपलिन का बहुत बड़े प्रशंसक थे, चार्ली चैपलिन की मूंछे उन्‍हें भा गईं थी।
  • उनकी मूंछो को “टुथब्रश मुछें” कहा जाता हैं।

एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) की मृत्‍यृ:

जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर की मौत पर हमेशा से ही विवाद रहा हैं। कहा जाता हैं कि हिटलर ने अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन के साथ एक भूमिगत बंकर में आत्महत्या की थी। इतिहासकारों के अनुसार हिटलर के शव की शिनाख्त नहीं की गई थी। कुछ रूसी सैनिकों ने उनके शव को जला दिया था। तभी से हिटलर की मौत पर रहस्य गहराया हुआ हैं। एक किताब में दावा किया गया है कि हिटलर 1945 में बर्लिन स्थित भूमिगत बंकर में मरा नहीं था। बल्कि अमेरिका से हुए एक गुप्त समझौते के तहत ईवा ब्राउन को लेकर दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना चला गया था। जहां वह 1962 में अपनी मृत्यु तक रहा था।

एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) के विचार :

  1. विजेता से कभी नहीं पूछा जायेगा कि क्या उसने सच कहा था।
  2. महान सत्यवादी महान जादूगर भी होते हैं।
  3. यदि आप एक बड़ा झूठ बोलते हैं, और उसे बार-बार बोलते हैं, तो उस पर यकीन किया जायेगा।
  4. शक्ति बचाव में नहीं आक्रमण में निहित हैं।
  5. ये नहीं समझ आता कि इंसान प्रकृति के जितना ही क्रूर क्यों नहीं हो सकता।
  6. नफ़रत नापसंदगी की तुलना में अधिक स्थायी होती हैं।
  7. वो सत्य नहीं है जो मायने रखता है, बल्कि वो जीत हैं।
  8. कितना भाग्यापूर्ण हैं, उन सरकारों के लिए कि जिन लोगों पर वे शासन करते हैं वे सोचते नहीं।
  9. शब्द अज्ञात क्षेत्रों में पुल का निर्माण करते हैं।
  10. हमेशा ही विश्वास के खिलाफ लड़ना ज्ञान के खिलाफ लड़ने से अधिक कठिन होता हैं।
  11. जो कोई भी आकाश को हरा और मैदान को नीला देखता हैं, उसे मार देना चाहिए।
  12. चुनाव के माध्यम से एक महान व्यक्ति खोजने से पहले एक ऊंट सुई की आंख से निकल जायेगा।
  13. केवल वही, जो युवाओं का मालिक होता हैं, भविष्य में लाभ उठता हैं।
  14. जर्मनी या तो एक विश्व-शक्ति होगा या फिर होगा ही नहीं।
  15. मानवतावाद मूर्खता और कायरता की अभिव्यक्ति हैं।
  16. व्यापक जनसँख्या किसी और ताकत से अधिक भाषण की अपील के प्रति संवेदनशील होती है।
  17. कोई भी गठबंधन जिसका उद्देश्य युद्ध शुरू करना नहीं है, वो मूर्खतापूर्ण और बेकार है।
  18. सफलता ही सही और गलत का एकमात्र सांसारिक निर्णायक हैं।
  19. कौन कहता है कि, मैं भगवान् की विशेष सुरक्षा के अंतर्गत नहीं हूँ।
  20. मानवजाति शाश्वत संघर्ष से शक्तिशाली हुई हैं, और ये सिर्फ अनंत शांति के माध्यम से नष्ट होगी।
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